एपस्टीन फाइल में कॉकरोच मंत्री,कॉकरोचिस्तान की संसद में हंगामा \ व्यंग्य - rashtrmat.com

एपस्टीन फाइल में कॉकरोच मंत्री,कॉकरोचिस्तान की संसद में हंगामा \ व्यंग्य

रमेश कुमार ‘रिपु’ बता रहे हैं  “कॉकरोच जनता पार्टी” श्रृंखला के व्यंग्य समकालीन राजनीति की उन विडंबनाओं पर तीखा प्रहार करते हैं, जहाँ सत्ता परिवर्तन तो होता है, लेकिन सत्ता का चरित्र नहीं बदलता। यहाँ “कॉकरोच” केवल एक कीट नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रवृत्ति का प्रतीक है जो हर व्यवस्था में अपने लिए जगह बना लेती है, हर विचारधारा में समा जाती है और हर संकट से बच निकलती है।

रमेश कुमार“रिपु”

   कॉकरोच जनता पार्टी का चुनाव

शहर में पहली बार “कॉकरोच जनता पार्टी” ने चुनाव लड़ा।उनका चुनाव चिन्ह था, रसोई की दरार।

नारा था,“हर घर में हमारा अधिकार!”

जनता खुश थी।उन्हें लगा कि कम से कम ये नेता ईमानदार हैं।दिन में नहीं दिखते, रात में खुलकर घूमते हैं।जो खाते हैं, सामने खाते हैं।भागते भी हैं तो सीधे नाली में भागते हैं।दोगलापन नहीं है।

पार्टी का मुख्य उम्मीदवार था,कॉमरेड करकरोच प्रसाद।

उसने मंच से भाषण दिया,“भाइयों और बहनों,हम वर्षों से आपके किचन में संघर्ष कर रहे हैं।

कभी चप्पल खाई, कभी झाड़ू।अब वक्त आ गया है कि शोषित कॉकरोच सत्ता में आए!”

भीड़ भावुक हो गई।

एक बूढ़ी अम्मा बोली,“देखो,कितना जमीन से जुड़ा नेता है,सचमुच जमीन पर ही चलता है!”

चुनाव हुआ।कॉकरोच जनता पार्टी भारी बहुमत से जीत गई।पहले ही महीने विधायक जी ने घोषणा कर दी,“हर घर में अंधेरा जरूरी है।रोशनी लोकतंत्र के लिए खतरा है।”

फिर मंत्री बनते ही उन्होंने नया कानून पास किया,“झाड़ू रखना राष्ट्रविरोधी गतिविधि माना जाएगा।”

जनता चौंकी।जो कॉकरोच पहले बची-खुची रोटी खाते थे,अब पूरे राशन पर कब्जा करने लगे।

टीवी चैनलों पर बहस शुरू हो गई,“क्या कॉकरोचों को भी विकास का अधिकार नहीं?”

धीरे-धीरे शहर में बदबू बढ़ने लगी।लोग परेशान हुए।तब एक बच्चा बोला,“माँ,गलती कॉकरोचों की नहीं थी…गलती हमारी थी,हमने नाली साफ करने की जगह,उसे विधानसभा भेज दिया।”

कॉकरोच मंत्री का स्टिंग ऑपरेशन

एक रात न्यूज़ चैनल पर अचानक ब्रेकिंग न्यूज़ चली,“देखिए!कैसे कॉकरोच मंत्री नोटों के डिब्बे में घुसते पकड़े गए!”

वीडियो में साफ दिख रहा था,मंत्री जी पहले अंधेरे कमरे में घुसे,फिर टेबल पर रखे पैसों के ऊपर आराम से बैठ गए।

पत्रकार चिल्लाया,“देश देख रहा है!लोकतंत्र खतरे में है!”

उधर मंत्री जी ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला ली।उन्होंने गंभीर चेहरा बनाकर कहा,“ये रिश्वत नहीं थी।

हम तो सिर्फ नोटों की गुणवत्ता जांच रहे थे।क्योंकि जनता का पैसा सुरक्षित रहना चाहिए।”

एक पत्रकार बोला,“लेकिन मंत्री जी, वीडियो में आप पैसे गिनते दिख रहे हैं!”

मंत्री जी मुस्कुराए,“गलत आरोप है।कॉकरोच गिनती नहीं करते,सिर्फ फैलते हैं।”

तभी पार्टी प्रवक्ता टीवी पर आ गए,“देखिए, विपक्ष मुद्दा भटका रहा है।असल सवाल यह है कि

वीडियो बनाने वाले कैमरे में विदेशी साजिश थी या नहीं?”

अगले दिन जांच समिति बैठी।समिति के अध्यक्ष भी कॉकरोच निकले।तीन महीने बाद रिपोर्ट आई

“वीडियो में दिख रहा कॉकरोच मंत्री जैसा जरूर लगता है,पर वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हुआ

कि वह वही कॉकरोच था।”

जनता फिर टीवी देखती रह गई।और उधर मंत्री जीनोटों की नई अलमारी का उद्घाटन करने चले गए।

कॉकरोच मंत्री जी का दौरा

कॉकरोच जनता पार्टी की सरकार बने छह महीने हो चुके थे।अब करकरोच प्रसाद जी मंत्री बन चुके थे।

पहले जो रसोई की दरार में रहते थे,अब लाल बत्ती वाली गाड़ी में रहने लगे थे।एक दिन मंत्री जी जनता का हाल जानने निकले।पूरा प्रशासन अलर्ट था।जहाँ-जहाँ मंत्री जी जाने वाले थे,वहाँ पहले से ही सारा कूड़ा फैला दिया गयाताकि उन्हें “घर जैसा माहौल” महसूस हो।मंत्री जी पहुंचे।

भीड़ चिल्लाई,“कॉकरोच जी जिंदाबाद!”

एक गरीब आदमी आगे आया और बोला,“मंत्री जी, घर में राशन नहीं है।”

मंत्री जी मुस्कुराए,“यही तो आत्मनिर्भरता है।हम तो वर्षों से बिना राशन के जी रहे हैं।”

दूसरा आदमी बोला,“साहब,अस्पताल में दवाई नहीं मिल रही।”

मंत्री जी बोले,“हमारी सरकार स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध है।देखिए, हम पर आज तक कोई दवाई असर नहीं कर पाई।”

तभी एक पत्रकार ने पूछ लिया,“मंत्री जी, चुनाव से पहले आपने कहा था कि आप जनता के घरों से गंदगी खत्म करेंगे?”

मंत्री जी हँसे,“बिलकुल खत्म कर दी।अब सारी गंदगी मंत्रालय में बैठती है।”

अगले दिन अखबार की हेडलाइन थी,“कॉकरोच मंत्री बोले :देश बदल रहा है,अब नाली सीधे सत्ता से जुड़ चुकी है।”

एपस्टीन फाइल में कॉकरोच मंत्री

एक सुबह देश में भूचाल आ गया।विदेश से आई “एपस्टीन फाइल” में कॉकरोच मंत्री जी का नाम भी निकला।टीवी एंकर चीखे,“देश जानना चाहता है!आख़िर मंत्री जी रातों-रात विदेश क्यों जाते थे?”

उधर मंत्री जी ने तुरंत सफाई दी,“देखिए…हम तो वैश्विक नाली कूटनीति के तहत गए थे।”

पत्रकार बोला,“लेकिन फाइल में लिखा है कि आप कई गुप्त पार्टियों में शामिल थे!”

मंत्री जी हँसे,“कॉकरोच अंधेरे में कहीं भी दिख सकते हैं।इसका मतलब ये नहीं कि हर अंधेरा हमारा है।”

फिर पार्टी प्रवक्ता आए।उन्होंने कहा,“ये सब अंतरराष्ट्रीय साजिश है।देश की तरक्की से घबराकर विदेशी ताकतें हमारे कॉकरोच मॉडल को बदनाम करना चाहती हैं।”

सोशल मीडिया पर समर्थक उतर आए,“जब दूसरे देशों में कॉकरोच घूम सकते हैं तो हमारे मंत्री क्यों नहीं?”

इधर जांच एजेंसियों ने बयान जारी किया,“फाइल का गहराई से अध्ययन किया जाएगा।”

जनता खुश हुई कि अब कुछ होगा।लेकिन दो दिन बाद वही एजेंसियाँ मंत्री जी के साथ मंच साझा करती दिखीं। जहाँ मंत्री जी “नैतिकता और पारदर्शिता” पर भाषण दे रहे थे।

अंत में एक बूढ़ा आदमी चाय पीते हुए बोला,“बेटा,कॉकरोच की सबसे बड़ी ताकत यही है…

वह हर गंदगी में फिट हो जाता है,और हर जांच के बाद और मोटा होकर निकलता है।”

 

              कॉकरोचिस्तान की संसद

कॉकरोचिस्तान की संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ।पूरा सदन शोर से भरा था।कोई मेज़ थपथपा रहा था,कोई दीवार पर चढ़ रहा था,तो कोई अंधेरे कोने में सौदेबाज़ी कर रहा था।

स्पीकर महोदय बार-बार चिल्ला रहे थे,“व्यवस्था बनाए रखिए!यह संसद है, नगरपालिका की नाली नहीं!”

लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था।सत्तापक्ष के नेता खड़े हुए और बोले,“हमारी सरकार ने ऐतिहासिक काम किए हैं।पहले कॉकरोच सिर्फ रसोई तक सीमित थे,आज हर विभाग में पहुँच चुके हैं।

इसे ही विकास कहते हैं!”

पूरा खजाना पक्ष मेज़ थपथपाने लगा।विपक्ष तुरंत खड़ा हुआ,“ये झूठ है!कॉकरोच फैलाने का असली काम तो हमने शुरू किया था।इन लोगों ने सिर्फ उसका उद्घाटन किया है!”

सदन में हंगामा शुरू हो गया।तभी एक युवा सांसद बोला,“माननीय अध्यक्ष महोदय,देश में कीटनाशक महँगा हो गया है।जनता परेशान है।”

सदन अचानक शांत हो गया।

सत्तापक्ष गरजा,“ये राष्ट्रविरोधी बयान है!”

विपक्ष बोला,“आप लोकतंत्र खत्म करना चाहते हैं क्या?”

स्पीकर ने तुरंत उस सांसद की बात रिकॉर्ड से हटवा दी।

उधर टीवी चैनलों पर बहस चल रही थी,“क्या कीटनाशक की मांग करना संविधान पर हमला है?”

रात तक संसद चलती रही।आख़िर में सर्वसम्मति से एक बिल पास हुआ,“राष्ट्रीय कॉकरोच संरक्षण अधिनियम”

जिसके तहत तय हुआ कि,हर सरकारी दफ्तर में कम से कम दस कॉकरोच होना अनिवार्य होगा।

सफाई अभियान से पहले कॉकरोचों का पुनर्वास किया जाएगा।और सबसे महत्वपूर्ण,“कॉकरोचों की आलोचना को लोकतंत्र विरोधी माना जाएगा।”

अगले दिन अखबार में छपा,“कॉकरोचिस्तान की संसद ने फिर साबित किया किजनता चाहे भूखी रहे,

लेकिन व्यवस्था हमेशा सुरक्षित रहनी चाहिए।”

            नाली से मंत्रालय तक

कॉकरोच प्रसाद बचपन से ही संघर्षशील थे।जहाँ दूसरे बच्चे स्कूल जाते थे,वह नालियों में संगठन खड़ा करते थे।उनका सपना बड़ा था,“एक दिन हर रसोई पर हमारा राज होगा।”

धीरे-धीरे उन्होंने मोहल्ले के सारे कॉकरोचों को जोड़ लिया।रात में गुप्त बैठकें होतीं।एजेंडा तय होता,

किस घर में सबसे ज़्यादा गंदगी है कहाँ बिना डर के फैल सकते हैं और किस इंसान को देखकर तुरंत भागना है।फिर लोकतंत्र आया।

एक बुद्धिजीवी बोला,“हमें हाशिए के जीवों को भी मुख्यधारा में लाना चाहिए।”

बस,यहीं से कॉकरोच प्रसाद की किस्मत बदल गई।उन्होंने पार्टी बनाई,“जनसेवी कॉकरोच मोर्चा”

घोषणापत्र में लिखा था,“हर घर में समान अंधेरा मिलेगा।”

जनता भावुक हो गई।एक युवक बोला,“कम से कम ये नेता हमारे बीच से निकला है।सचमुच नाली से उठा है।”

चुनाव हुआ।कॉकरोच प्रसाद विधायक बन गए।पहले दिन ही मंत्रालय पहुँचे तो भावुक हो उठे।

आँखों में आँसू थे।उन्होंने कुर्सी सहलाते हुए कहा,“संघर्ष रंग लाया,कल तक लोग चप्पल मारते थे,

आज सलाम ठोक रहे हैं।”

कुछ महीनों बाद वही कॉकरोच प्रसाद ठेके बाँटने लगे।फाइलें खाने लगे।और रात में सूट पहनकर विदेशी दौरों पर जाने लगे।एक पत्रकार ने पूछा,“मंत्री जी, क्या सत्ता में आने के बाद आप बदल गए हैं?”

मंत्री जी मुस्कुराए,“नहीं,हम बदले नहीं हैं।बस अब नाली थोड़ी बड़ी हो गई

रमेश कुमार“रिपु”

MO-7974304532