नीले ड्रम प्रकरण से हमें नहीं घबराना चाहिएःप्रज्ञा - rashtrmat.com

नीले ड्रम प्रकरण से हमें नहीं घबराना चाहिएःप्रज्ञा

राष्ट्रमत न्यूज नई दिल्ली((कुमार सुबोध))। नई दिल्ली में आईटीओ स्थित हिन्दी भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता श्रीमती प्रज्ञा परांडे कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हमें नीले ड्रम वाले प्रकरण से घबराना नहीं चाहिए। समाज के पटल पर बेटा और बेटी एक समान हैं। इस पर चिंतन करने की जरूरत है कि आजकल के बच्चे अपने माता पिता को घर से क्यों निकालते हैं। यह ज्वलंत समस्या है।इस पर विचार करने की जरूरत है।


महिलाएं भीतर से सजग हैं
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती अनीता वर्मा सेठी ने कहा कि महिलाएं भीतर से सजग रहती है समाज में अपने आप को स्थापित करने की कला वो जानती है। वे प्रबुद्ध और जागरूक हैं। स्वयं को प्रमाणित करने के लिए बहुत समस्याओं से होकर उन्हें गुजरना पड़ता है।उन्होंने आगे कहा कि लेखन से फलक विस्तृत होता जाता है। वैश्विक हिंदी परिवार एक मंच पर लाकर महिलाओं को विस्तार देता है। इस वर्ष इनके तत्वावधान में सम्पन्न अंतरराष्ट्रीय भाषा सम्मेलन में 60 से अधिक महिलाओं की भागीदारी रही। इसकी आजीवन सहयोगियों में 80 महिलाएं हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रवासी प्रकरणों के माध्यम से दिग्दर्शन किया कि शिक्षक को बहुत सम्मान मिलता है। आर्मेनिया में एक महीना शिक्षक दिवस मनाया जाता है। दाल पर छोंक लगाने शीर्षक से उन्होंने एक कविता सुनाई।


प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित
इस अवसर पर विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया। कवयित्री एवं हास्यव्यंग्य लेखिका डाॅ निशा भार्गव,लेखिका एवं शिक्षाविद् डाॅ अरूणा गुप्ता, लेखिका श्रीमती आशमा कौल,प्रतिष्ठित चित्रकार डाॅ वंदना दुबे,शोधार्थी एवं शिक्षार्थी सुश्री संतोष कुमारी आदि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


महिलाओं की स्थिति अच्छी है
इस अवसर पर डाॅ.कीर्ति काले ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी है। अपने आप सारे काम कर लेती हैं। अपनी बेटी के लिए युद्ध की परिस्थितियों में फ्लाइट की स्वयं व्यवस्था किए जाने के प्रकरण को उदृधत करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण का विशिष्ट उदाहरण है। आज महिलाएं वैश्विक फलक पर सोच सकती हैं। मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक आधार पर वे स्वयंसिद्ध हैं।
पुरुषों के बगैर स्त्रियों का वजूद नहीं
प्रवासी साहित्यकार डाॅ रीता कौशल ने अपने अतिसंक्षिप्त वक्तव्य में रेखांकित किया कि पुरुष के वजूद को नकारकर स्त्रियों का कोई आधार नहीं है। इसलिए उन्हें भी जीवन में सभी पक्षों के साथ सामंजस्य बनाए रखने की प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए जीवनयापन करते रहना चाहिए। उन्होंने करवाचैथ पर एक कविता का पाठ किया। प्रवासी कवयित्री श्रीमती संध्या भगत ने भी अपनी बात रखी।


अपनी मानसिकता को बदलें
डाॅ दिव्या माथुर ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं को स्वयं आगे आना चाहिए। पुरूषों को भी समझाना होगा। दोनों पक्षों को अपनी.अपनी मानसिकता को बदलना होगा। डाॅ सविता चडढा ने कहा कि वह कुछ समय पूर्व 108 वर्ष की महिला से मिली। मैने देखा कि उनके हाथ में धार्मिक पुस्तक थी। बच्चों और परिवार के अन्य सभी सदस्यों ने समर्पण भाव से घर में स्वर्ग जैसा माहौल दिया है। मैं उन्हें सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनका अभिनंदन करती हूं। उन्होंने कहा कि जो महिलाओं की परवाह नहीं करते उन्हें भी नहीं करना चाहिए।
डाॅ निशा भार्गव ने अपने चिर.परिचित और चुटकीले अंदाज में हास्य.व्यंग्य की की रचना पढ़ी-
पार्टी में आने वाली एक महिला ने
अपने नाटे कद को छुपाया।
बाँधा ऊँचा सा जूड़ा
और पहना हाई हील का सैंडल।
उसकी बनावटी ऊँचाई को देखकर
एक महिला बोली हंसकर।
आपने अपने कद का मान बढ़ाया है।
अपने कद को बढ़ाने के लिए
एड़ी चोटी का जोर लगाया है।


दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम शुरू
कार्यक्रम से पहले मंचासीन गणमान्य विभूतियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम आरंभ किया। इसी क्रम में श्रीमती रचना पथिक ने मां सरस्वती वंदना की एक रचना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वातायन यूके की संस्थापिका एवं सुप्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार डाॅ दिव्या माथुर थी। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री श्रीमती विभा राज वैभवी ने किया।


सैकड़ों लोग उपस्थित रहे
इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ सविता चडढा,वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार डाॅ रीता कौशल उपस्थित थीं। वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष, कवि,लेखक एवं समीक्षक अनिल जोशी,एवं मानद निदेशक विनयशील चतुर्वेदी, वैश्विक हिंदी परिवार की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा उपस्थित रहे। संयोजन में शिवम एवं मनोज श्रीवास्तव अनाम का सहयोग रहा। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र के दौरान आमंत्रित कुछ अन्य चुनिंदा कवयित्रियों डाॅ अंजू जैन,डाॅ निवेदिता शर्मा, डाॅ मंजू गुप्ता, श्रीमती निधि मानवी,श्रीमती शुभ्रा पालीवाल, श्रीमती कल्याणी शांडिल्य शर्मा, डाॅ अरूणा गुप्ता, श्रीमती मीनाक्षी यादव,सुश्री संतोष कुमारी, सुश्री पूजा श्रीवास्तव, श्रीमती सरिता जैन, श्रीमती रचना पथिक, श्रीमती आश्मा कौल,श्रीमती ऊषा श्रीवास्त,श्रीमती कुसुम चैहान आदि ने अपनी रचनाएं सुनाईं।महिला दिवस के अवसर पर डाॅ कल्पना पांडेय,डाॅ मंजू गुप्ता, सतीश भार्गव,सत्यवाल चावला,अरविंद पथिक,डाॅ उषा श्रीवास्तव,डाॅ राजेश श्रीवास्तव,नरेश शांडिल्य,पूजा श्रीवास्तव,श्रीमती कल्याणी शांडिल्य,नीरज त्यागी श्रीमती सुनीता शर्मा,कुमार सुबोध सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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