राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।बैहर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत लूदा एक आदिवासी बाहुल्य गांव है। जिसके अधीन बैगा समुदाय का छोटा सा गांव मसीहा आता है।जिसे स्थानीय लोग बैगाटोला के नाम से जानते हैं। लगभग 15 घरों की आबादी वाला यह टोला आज भी मूलभूत सुविधाए पक्की सड़क से वंचित है। हालात यह हैं कि टोले तक पहुंचने के लिए केवल एक संकरी पगडंडी है,जो पूरी तरह उबड़.खाबड़ है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। जिससे ग्रामीणों का आना.जाना बेहद मुश्किल हो जाता है।ग्रामीण सांसद से पूछ रहे हैं कि समृद्धि वाली सड़क कब बनेगी आदिवासी बैगा मसीहटोला में।

पुलिया है मगर गुणवता वाली नहीं
बैगा बसाहट जैसे विशेष पिछड़े समुदायों के लिए केंद्र सरकार द्वारा पीएम जनमन योजना चलाई जा रही है। जिसके तहत सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। बावजूद इसके मसीहाटोला अब तक इस योजना से बाहर है। जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। रास्ते में पड़ने वाले तीन नालों पर पाइप और स्लैब पुलिया का निर्माण किया गया है,लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ये पुलिया घटिया गुणवत्ता की बनी हैं। न तो इनकी ऊंचाई सही है और न ही मजबूती। हल्की बारिश में ही पानी ऊपर से बहने लगता है। जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस गंभीर समस्या पर न तो ग्राम पंचायत के सरपंच.सचिव ध्यान दे रहे हैं और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि।

कब बनेगी पक्की सड़क
हालात से जूझते आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल पक्की सड़क निर्माण की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई, बीमारों का इलाज और दैनिक जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। वहीं ग्राम पंचायत सरपंच चमरू सिंह टेकाम का कहना है कि पीएम जनमन योजना से सड़क निर्माण के लिए प्रयास किए गए हैं और सर्वे का कार्य भी हो चुका है। लेकिन निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है। आदिवासी और बैगा समुदाय के विकास के दावों के बीच मसीहाटोला की यह बदहाली प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल बनकर खड़ी है।