राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सेवा संस्था दक्षिण एवं उत्तर वनमंडल बालाघाट जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद तथा स्थानीय किसान.सारस मित्रों के संयुक्त प्रयास से बालाघाट जिले में वार्षिक सारस गणना की गयी। छह दिनों तक चले इस अभियान के दौरान जिले के 66 स्थानों पर पारंपरिक एवं वैज्ञानिक पद्धति से सारस पक्षियों की गणना की गई।बालाघाट में कुल 50 सारस मिले।

गोंदिया में 32 सारस मिले
19 जून को 22 टीमों ने विभिन्न विश्राम स्थलों, खेतों, तालाबों एवं नदी क्षेत्रों में पहुंचकर प्रत्यक्ष गणना की। इसके बाद 19 से 25 जून तक सारसों की मौजूदगी का सत्यापन किया गया।स्थानीय किसानों और ग्रामीणों से भी जानकारी जुटाई गई। जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। गणना में बालाघाट जिले में कुल 50 सारस दर्ज किए गए,जबकि पड़ोसी महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में 20 जून को 35 टीमों ने 53 स्थानों पर किए गए सर्वेक्षण में 32 सारस पाए गए। संस्था के अनुसार बाघ एवं वैनगंगा नदी के दोनों ओर स्थित बालाघाट और गोंदिया की जैव विविधता काफी समान है इसलिए सारस पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए दोनों राज्यों के बीच स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।
अभियान से जोड़ा गया
संस्था पूरे वर्ष सारसों के विश्राम स्थल प्रजनन क्षेत्र और भ्रमण मार्ग का अध्ययन करती है। साथ ही किसानों एवं विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और सारस संवर्धन के प्रति जागरूक कर इस अभियान से जोड़ने का कार्य भी निरंतर किया जाता है। संपूर्ण अभियान में दक्षिण बालाघाट वनमंडल अधिकारी एल नित्यानंद उत्तर बालाघाट वनमंडल अधिकारी आर. धुर्वे सेवासंस्था के अध्यक्ष सावन बहेकार एसडीओ विनिता फुलबेले सहित वन विभाग के अधिकारियों संस्था के सदस्यों जिला पुरातत्व एवं संस्कृति परिषद तथा स्थानीय किसान.सारस मित्रों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।