राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।रीवा के नौवस्ता स्थित डालमिया सीमेंट प्लांट को लेकर ग्रामीणों और कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों ग्रामीण और प्लांट से निकाले गए कर्मचारी पिछले 17 दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस गांव की जमीन पर प्लांट खड़ा हुआ, उसी गांव के लोगों को अब रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर अपनी समस्याएं रखीं और बातचीत भी की, लेकिन उनका कहना है कि अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है।

रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
ग्रामीणों के मुताबिक, प्लांट के लिए जमीन देने के बदले स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। लेकिन अब रोजगार का मुद्दा ही विवाद की वजह बन गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जेपी के समय से कई वर्षों तक काम करने वाले 200 से ज्यादा सुरक्षा गार्डों को डालमिया सीमेंट प्लांट के आने के बाद नौकरी से बाहर कर दिया गया। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें दोबारा काम पर रखा जाए और उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

जमीन की लीज अवधि समाप्त
वहीं, ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जमीन की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी खनन किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है, तो मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल जरूरी है।

प्रशासन क्या कदम उठाता है
एक तरफ रोजगार छिनने का आरोप लगाते कर्मचारी हैं, तो दूसरी तरफ अपने गांव, जमीन और अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे ग्रामीण। 17 दिनों से जारी यह धरना अब प्रशासन और प्लांट प्रबंधन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या स्थानीय लोगों के रोजगार और खनन संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान होगा? अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और प्लांट प्रबंधन अपना पक्ष किस तरह रखता है।

जनहित के प्रमुख सवाल:
1. क्या नौकरी से निकाले गए 200 से अधिक सुरक्षा गार्डों की शिकायत पर जांच हुई है?
2. स्थानीय लोगों को रोजगार देने के संबंध में क्या कोई लिखित समझौता या शर्त थी?
3. क्या संबंधित खदान की लीज अभी वैध है? यदि अवधि समाप्त हुई है, तो खनन किस अनुमति के आधार पर जारी है?
4. 17 दिनों से जारी धरने पर प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की ओर से क्या ठोस कार्रवाई की गई है?