कल्पना मिश्रा कांडःपिता को मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट नहीं मिली - rashtrmat.com

कल्पना मिश्रा कांडःपिता को मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट नहीं मिली

 राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। रीवा का बहुचर्चित कल्पना मिश्रा कांड जिसकी वजह से डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला निशाने पर आ गए थे। कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत संजय गांधी अस्पताल में हो गयी थी। उनकी मौैैैैैैैत के दो माह बाद भी उनके पिता को आज तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली। जबकि कल्पना मिश्रा की मौत 26 अगस्त हो हुई थी।


दो माह बाद नहीं मिली जांच रिपोर्ट
कल्पना मिश्रा कांड पर रीवा कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश 4 सितम्बर को दिये थे।जांच अधिकारी को एक महीने में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।बुधवार को कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा. उन्हें अब तक जांच रिपोर्ट नहीं दी गयी। जबकि यह रिपोर्ट बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी।
डिप्टी सीएम भद्द से बचने ये किया था
रीवा में कांग्रेस ने कल्पना मिश्रा की मौत को सड़क से लेकर विधान सभा तक उठाया था। डिप्टी सीएम की बेहद किरकिरी हुई थी। उन्होंने हो रही अपनी भद्द से बचने के लिए कलेक्टर से मिलकर 4 सितंबर को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी करने को कहे थे। जांच की जिम्मेदारी सिरमौर एसडीएम दृष्टि जायसवाल को दी गई थी। उन्हें सात बिंदुओं पर जांच कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी थी।लेकिन आज तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई और न ही रामशिरोमणि को मिली।


ऐसा किया जाना था प्रशासन को
प्रशासन को कल्पना मिश्रा कांड के संदर्भ में जांच में उनकी गर्भावस्था के दौरान हुए परीक्षणों की जानकारी जुटाई जानी थी। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर मौत तक के घटनाक्रम की जांच भी इसमें शामिल थी।इलाज में शामिल डाॅक्टरों और कर्मचारियों की क्या भूमिका थी उसकी पड़ताल की जानी थी। परिजनों के आरोपों की जांच भी होनी थी। राज्य स्तरीय तकनीकी जांच दल की रिपोर्ट को भी मजिस्ट्रियल जांच में शामिल किया जाना था।
तारीख तय की गयी थी
कल्पना मिश्रा कांड की जांच के लिए एसडीएम सिरमौर ने 12-24 सितंबर के बीच कलेक्टर कार्यालय में सुनवाई की तारीख तय की थी। पीड़ित पक्ष प्रत्यक्षदर्शियों और घटना से जुड़ी जानकारी रखने वाले लोगों को साक्ष्य और लिखित बयान देने का मौका दिया गया।तारीख तय होने के बाद रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं यह बहुत बड़ा सवाल है। सवाल इसलिए कि क्या प्रशासन मौत में किसी को बचाने और डिप्टी सीएम की किरकिरी पर पर्दा डालने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिया था। लगता यही है।
डिप्टी सीएम ने ये किया पर रिपोर्ट नहीं आई

अधीक्षक को पद से हटाया गया था

कांग्रेस के दबाव में डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने 2 डाॅक्टरों और 2 नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया। अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक को पद से हटाया गया था। मेडिकल काॅलेज के तत्कालीन डीन का तबादला भी किया। ताकि कंाग्रेस सहित जनता को भी लगे कि वो कल्पना मिश्रा कांड को गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन उन्होंने वो नहीं होने दिया जिसका आदेश कलेक्टर ने उनके कहने पर दिया था।


आमरण अनशन से टेंशन में थे राजेन्द्र
कांग्रेस का धरना प्रदर्शन और कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा 2 सितंबर से आमरण अनशन से डिप्टी सीएम टेंशन में आ गए थे। रामशिरोमणि 16 सितंबर तक आमरण अनशन पर बैठे थे। यानी 15 दिन तक अनशन पर रहे। 16 सितंबर को प्रशासन ने उनकी तबीयत बिगड़ने का हवाला देकर उन्हें धरना स्थल से हटाया। जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
अब रिपोर्ट मिलने का इंतजार
28 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे रामशिरोमणि मिश्रा ने जांच रिपोर्ट नहीं मिलने की बात मीडिया से की। उन्होंने कहा जांच रिपोर्ट बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी। लेकिन उन्हें अभी तक रिपोर्ट नहीं दी गयी।

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