राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। जिले के बैहर क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर 3 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई। इनमें से 2 बच्चों ने रविवार को दम तोड़ा, जबकि एक बच्चे की मौत 22 अक्टूबर को हुई थी। मृतकों में बिरसा विकासखंड के खैरटोला की 3 साल की रेखा और सोनगुड्डा के सुंदरवाही का 2 महीने का शिवम उइके शामिल हैं। रेखा की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है, जबकि शिवम की मौत श्वास नली में दूध जाने से होने की आशंका जताई गई है।
सैंपल रिपोर्ट आना बाकी है
इससे पहले 22 अक्टूबर को मातला निवासी 1 साल 4 महीने के बिसरू परते की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, उसकी मौत मलेरिया से हुई है, हालांकि सैंपल रिपोर्ट आना बाकी है। सीएमएचओ डॉ. शत्रुघन सिंह दाहिया ने तीनों बच्चों की मौत के मामलों में बाल मृत्यु समीक्षा कराने की बात कही है।
अस्पताल में इलाज चल रहा है
बैहर के आदिवासी इलाकों में जून से ही बच्चों की मौतों के मामले सामने आ रहे हैं। इनकी वजह खसरा, मलेरिया, कुपोषण और चर्मरोग जैसी बीमारियां बताई जा रही हैं। मातला के कुछ बीमार बच्चों का लांजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बच्चे को डकार दिलाना जरूरी
सीएमएचओ डॉ. दाहिया के मुताबिक, स्तनपान के बाद छोटे बच्चे को डकार दिलाना जरूरी है। कई बार बच्चा दूध पीने के बाद मुंह में दूध रखे रहता है। सोते समय यह दूध भोजन नली से वापस आकर श्वास नली में जा सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।