पानी है नहीं,टंकी बनी है,नल जल योजना है प्यासी - rashtrmat.com

पानी है नहीं,टंकी बनी है,नल जल योजना है प्यासी

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।बालाघाट जिले के मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कान्हटोला में केन्द्र सरकार की नल जल योजना की हकीकत हैरान कर देती है।पेयजल योजना पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। पानी टंकी केवल शो पीस बन गयी है।पानी आता नहीं। ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं।


पानी की आपूर्ति बंद
ग्रामीणों ने बताया कि एक वर्ष पहले गांव में प्लास्टिक की पानी की टंकियां स्थापित कर पाइपलाइन बिछाई गई थी। करीब 50 परिवारों को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। लेकिन शुरूआती दौर के बाद ही व्यवस्था चरमरा गई। वर्तमान स्थिति यह है कि पानी की आपूर्ति बंद होने के कारण टंकियों के नीचे बने लोहे के ढांचों का उपयोग ग्रामीण अब जानवरों का भूसा पैरा रखने के लिए कर रहे हैं। गांव में बिछाई गई पाइपलाइनें कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। घरों के बाहर लगाए गए नल कनेक्शन टूट गए हैं और सीमेंट के पिलर भी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में घर.घर पानी पहुंचाने की पूरी व्यवस्था निष्प्रभावी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सिर्फ एक हैंण्डपंप पर आश्रित गांव
जल संकट की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे गांव काएकमात्र हैंडपंप पर निर्भर है। सुबह से शाम तक भीड़ रहती है।कई बार पानी भरने को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि जब यह हैंडपंप खराब हो जाता है तो प्रशासन की ओर से तत्काल कोई सहायता नहीं मिलती। मजबूर होकर गांव के लोग आपस में चंदा एकत्रित करते हैं और निजी स्तर पर उसकी मरम्मत कराते हैं। इसके अलावा कई परिवारों को खेतों में बने कुओं का पानी पीना पड़ता है।कान्हटोला की यह तस्वीर न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दशार्ती है कि निगरानी और जवाबदेही के अभाव में विकास की योजनाएं किस तरह कागजों तक सीमित होकर रह जाती हैं।

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