पाकिस्तान की जेल से सात साल बाद प्रसन्नजीत लौटा,मानसिक स्थिति ठीक नहीं - rashtrmat.com

पाकिस्तान की जेल से सात साल बाद प्रसन्नजीत लौटा,मानसिक स्थिति ठीक नहीं

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। पाकिस्तान की उस जेल में सात साल बालाघाट के प्रसन्नजीत ने काटे,जहां भगत सिंह को फांसी दी गयी थी। बहन संघ मित्रा के अथक प्रयास से आज प्रसन्नजीत अपने परिवार के बीच है। घर वाले उसके लौटने की उम्मीद छोड़ चुके थे। लेकिन एक फोन काल ने घर वालों की उम्मीदें जगा दी। कुलजीतसिंह कचवाहा पाकिस्तान से फोन किया कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान में लाहौर की जेेल में है। बहन संघमित्रा को भरोसा हो गया कि उसकी राखी में ताकत है,उसका भाई जहां भी होगा जरूर एक दिन घर लौट आएगा।


हर संभव मदद दी जाएगी
पाकिस्तान की जेल से करीब 7 साल बाद बालाघाट लौटे प्रसन्नजीत रंगारी की मानसिक स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है। उनकी बहन संघमित्रा ने प्रशासन से भाई के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। संघमित्रा का कहना है कि प्रसन्नजीत पुरानी बातें भूल चुका है। इस पर कलेक्टर मृणाल मीणा ने आश्वासन दिया है कि परिवार को हर संभव मेडिकल सहायता दी जाएगी।
भाई की वापसी के लिए सब किया
रविवार 01 फरवरी की दोपहर करीब 01 बजे फोन की घंटी बजी और आवाज सुनाई दी कि आपके भाई को पाकिस्तान से रिहा कर दिया गया है। जहां उस काल के बाद बहन संघमित्रा की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। क्यों कि संघमित्रा ने सालों तक थानों कलेक्टर कार्यालयों नेताओं और मंत्रालयों के चक्कर लगाए थे। 2021 में जब पहली बार पता चला कि भाई जिंदा है और पाकिस्तान की जेल में बंद है।तब से वह निरंतर भाई की रिहाई के लिए अकेली ही जंग लड़ती रही। लेकिन बहन का संघर्ष कमजोर नहीं पड़ा। उसे स्थानीय लोगो और कुछ जनप्रतिनिधियों का सपोट मिला। जिसका आज सुखद परिणाम यह रहा कि संघमित्रा का भाई प्रसन्नजीत आज घर लौट आया।


घर वाले मृत मान लिए थे
बहन संघमित्रा खोब्रागढ़े ने बताया कि उसका भाई प्रसन्नजीत पढ़ाई में तेज था। पिता ने कर्ज लेकर उसे जबलपुर से बीफामेर्सी पढ़ाया। लेकिन प्रसन्नजीत की मानसिक बीमारी ने पूरे परिवार की जिदगी की दिशा ही बदल दी। फिर प्रसन्नजीत 2016-17 में अचानक लापता भी हो गया। जिसकी खूब तलाश की गई। लेकिन वह कहीं नही मिला। वक्त के साथ साथ परिजना ने प्रसन्नजीत को मृत मान लिया था।लेकिन वह 2019 से पाकिस्तान जेल में कैद था। प्रसन्नजीत ने 7 साल पाकिस्तान की जेल मे काटे। प्रसन्नजीत की वापसी के संघर्ष में गांव के ही ह्युमन राइट्स एक्टिविस्ट अधिवक्ता कपिल फूले फरिश्ता बनकर आए। जहां उन्होंने भी संघमित्रा की इस लड़ाई में कानूनी तौर पर साथ दिया।
पिता का उस दिन देहांत हो गया
मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद प्रसन्नजीत की रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आई।पाकिस्तान की जेल से प्रसन्नजीत की फोटो के साथ ही कुछ जानकारी प्राप्त हुई। इसमें प्रसन्नजीत से पूछा गया था कि अगर आपको भारत भेज दिया गया तो कहां रहोगे। तब प्रसन्नजीत ने अपने घर पर रहने के इच्छा जाहिर की। इस दौरान गृह मंत्रालय के फारेन डिविजन ने मध्यप्रदेश सरकार को प्रसन्नजीत के नागरिकता स्टेटस की जांच करने के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही पाकिस्तान से आए प्रपत्र बहन संघमित्रा को दिखाए गए और वेरिफिकेशन हुआ। लेकिन दर्द की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्रसन्नजीत की रिहायी हेतु जिस दिन वेरिफिकेशन के दस्तावेज आए, उसी दिन पिता की मौत हो गई। बेटे के इंतजार में उनकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं। लेकिन वक्त के साथ साथ माँ ने भी मानसिक संतुलन खो दिया।


ट्रेन से पहुंचा था पाकिस्तान
प्रसन्नजीत आज घर तो लौट आया है,लेकिन उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। इसलिए इस सवाल पर अभी भी पर्दा डला हुआ है कि वह पाकिस्तान कैसे पंहुचा। लेकिन बालाघाट मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रसन्नजीत ने कहा कि वह सबसे पहले ट्रेन से दिल्ली गया फिर वहां से पाकिस्तान चला गया। लेकिन उसे पाक सेना ने लाहौर की कोट लखपत जेल में 7 साल कैद करके रखा। जिसे लाहौर सेंट्रल जेल के रूप में भी जाना जाता है। यह वही जेल है जहां 1931 में भगत सिंह को फांसी दी गई थी और अप्रैल 2013 में भारतीय कैदी सरबजीत सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था।
पेड़ों की पत्तियां साफ करता था
31 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा रिहा कि गए 6 कैदियों में प्रसन्नजीत का नाम भी शामिल था। जिसके बाद प्रशासनिक मदद से उसे शुक्रवार को सुरक्षित घर लाया गया। परिवार ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आभार जताया है।प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोब्रागढ़े ने बताया कि रात में बातचीत के दौरान प्रसन्नजीत ने कहा कि उसे जेल में पेड़ों से गिरी पत्तियों की सफाई के काम में लगाया जाता था। राहत की बात यह है कि वह अपनी बहन और जीजा को पहचान रहा है। शुक्रवार रात उसने घर पर भरपेट भोजन किया और उसे सुखद नींद आई।

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