राष्ट्रमत न्यूज,मुंबई(ब्यूरो)। मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को महाराष्ट्र के प्रमुख कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की 2006 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य आरोपी व उनके चचेरे भाई, पूर्व एनसीपी सांसद पद्मसिंह पाटिल सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।करीब 20 साल तक चले इस लंबे मुकदमे के दौरान अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत 128 गवाहों के बयान दर्ज किए थे।

आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया
सीबीआई का आरोप था कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और चीनी मिल के प्रबंधन को लेकर विवाद के चलते 30 लाख रुपये की सुपारी देकर इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, लेकिन दो दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।

अधिकांश साक्ष्यों को खारिज कर दिया
विशेष न्यायाधीश एसआर नवंदर ने कहा कि यह सिद्ध हो चुका है कि पाटिल (जो अब 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं और अदालत में व्हीलचेयर पर बैठे ) और पवनराजे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थे। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं। हालांकि, अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा प्रस्तुत अधिकांश साक्ष्यों को खारिज कर दिया।
अवैध हिरासत में रखा गया था
सीबीआई की विशेष अदालत ने कहा कि आरोपी से गवाह बने पारसमल जैन की गवाही को महत्वपूर्ण सबूत के रूप में पेश किया गया था, लेकिन यह संदिग्ध थी और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता था, क्योंकि जैन को गिरफ्तार किए जाने के बाद लगभग 15 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा गया था और उसे यातनाएं दी गई थीं।

किस-किस पर चला था हत्या का मुकदमा