बालाघाट में लड़ी और आवाज करने वाले पटाखे प्रतिबंधित - rashtrmat.com

बालाघाट में लड़ी और आवाज करने वाले पटाखे प्रतिबंधित

 राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट के लोगों को इस दीपावली में कई नियमों को पालन करना होगा।आवाज करने वाले और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे प्रतिबंधित हैं। मंदिर,अस्पताल,पेट्रोल पंप और गैस गोदाम के आस पास पटाखें फोड़ना प्रतिबंधित है।यदि ऐसा किसी ने किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

संपूर्ण बालाघाट  में प्रभावशील

जिले में दीपावली पर्व के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी आदित्य सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश 28 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक संपूर्ण बालाघाट जिले की सीमा में प्रभावशील रहेगा।

लड़ी वाले पटाखों पर भी प्रतिबंध रहेगा
इस संबंध में जारी आदेश के अनुसार, जिले में ऐसे पटाखों के क्रय-विक्रय, भंडारण, परिवहन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनके निर्माण में बेरियम साल्ट तथा एंटीमनी, लिथियम, मरकरी, आर्सेनिक, लेड और स्ट्रोंटियम क्रोमेट जैसे रसायनों का उपयोग किया गया है। लड़ी वाले पटाखों तथा ऐसे पटाखों के उपयोग पर भी प्रतिबंध रहेगा, जिनकी विस्फोट की तीव्रता स्थल से 04 मीटर की दूरी पर 125 डेसीबल से अधिक है।

यहां पटाखे फोड़ना प्रतिबंधित है

पटाखों की ई-कॉमर्स कंपनियों अथवा निजी व्यक्तियों द्वारा आनलाइन बिक्री तथा गैर-लाइसेंसी बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान, सिविल न्यायालय और धार्मिक स्थलों सहित घोषित शांत क्षेत्रों के 100 मीटर के दायरे में पटाखे चलाना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा आयुध निर्माणियों, पेट्रोल पंप, गैस गोदाम, पटाखा बाजारों तथा अन्य ज्वलनशील स्थानों पर भी पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।

नियमों का पालन करना होगा
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक पटाखा एवं विस्फोटक लाइसेंसधारी को प्रतिबंधित पटाखों के निर्माण, क्रय-विक्रय, परिवहन और भंडारण से संबंधित नियमों का पालन करना होगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वायु प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए त्योहार के दौरान ग्रीन पटाखों की श्रेणी के पटाखों के क्रय-विक्रय, वितरण और उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

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