राष्ट्रमत न्यूज,इंदौर(ब्यूरो)। इंदौर में तीन दिवसीय साहित्य उत्सव की आज से शुरुआत हुई। देशभर से कई भाषाओं के लेखक संपादक इस मंच को साझा कर रहे हैं। उद्घाटन अवसर पर साहित्य, कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। माधव कौशिक, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पद्मश्री शीन काफ निजाम, वाणी त्रिपाठी टिक्कू, उदय प्रकाश, ज्योति जैन, निखिल दवे, विश्वास व्यास और अरुण माहेश्वरी सहित अन्य अतिथियों ने उत्सव में सहभागिता की। शिव शेखर शुक्ल का वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश ने ‘युद्ध के विरुद्ध’ विषय पर बीज वक्तव्य दिया। सत्र का संचालन अदिति माहेश्वरी ने किया।

45 से अधिक साहित्यकार शामिल होंगे
इंदौर में वाणी साहित्य उत्सव-2026 का 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजन किया जाएगा। वाणी प्रकाशन ग्रुप की ओर से होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में देश के 45 से अधिक साहित्यकार, लेखक, कवि, अनुवादक और विचारक शामिल होंगे।कुल 27 सत्रों में साहित्य और संस्कृति से लेकर AI के दौर में लेखन, कॉपीराइट, अनुवाद और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
चर्चा के केंद्र में रहे समाज के ज्वलंत मुद्दे
उत्सव के पहले दिन साहित्य की बदलती भूमिका, समकालीन लेखन, स्त्री की अभिव्यक्ति और पौराणिक कथाओं की नए संदर्भों में व्याख्या जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। दोपहर में आयोजित ‘एआई युग में लेखक और संपादक की भूमिका’ सत्र ज्ञानरंजन की स्मृति को समर्पित रहा। इसमें माधव कौशिक, उर्मिला शिरीष और सत्य व्यास ने हिस्सा लिया, जबकि संवाद रोहिणी कुमारी ने किया।

मालिनी गौतम ने सहभागिता की
चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच लेखक और संपादक की जिम्मेदारी, रचनात्मकता की मौलिकता तथा साहित्य के भविष्य से जुड़े सवालों पर विचार किया गया। इसके बाद ‘स्त्रियां घर लौटती हैं’ विषय पर आयोजित सत्र चंद्रकान्त देवताले की स्मृति को समर्पित रहा। इसमें विवेक चतुर्वेदी, उदय प्रकाश, हेमंत देवलेकर और मालिनी गौतम ने सहभागिता की। सत्र का संचालन संतोष द्विवेदी ने किया। वक्ताओं ने साहित्य में स्त्री की उपस्थिति, घर के बदलते अर्थ और समकालीन रचनाओं में स्त्री अनुभवों की अभिव्यक्ति पर चर्चा की।
संवाद से मिले सार्थक सुझाव
पहले दिन के अगले सत्र में ‘लेखन की यात्रा, सत्य व्यास की जुबानी’ के माध्यम से लेखक सत्य व्यास ने अपनी रचनात्मक यात्रा, लेखन के अनुभवों और साहित्यिक दृष्टि से जुड़े विभिन्न पहलुओं को साझा किया। संवाद का संचालन अदिति माहेश्वरी ने किया। इसके बाद ‘पौराणिक कथाओं का पुनः पाठ’ विषय पर अक्षत गुप्ता और सौम्या कुलश्रेष्ठ के बीच संवाद हुआ। इसमें पौराणिक आख्यानों की समकालीन प्रासंगिकता, उनके भीतर निहित जीवन-दृष्टि और आधुनिक समाज के संदर्भ में उनकी पुनर्व्याख्या पर विचार रखे गए।
साहित्यिक के विविध रूपों पर चर्चा
धर्मवीर भारती की स्मृति को समर्पित ‘मतलब हिन्दू, असम्भव सारांश: गद्य और पद्य की जुगलबंदी’ सत्र में अम्बर पाण्डेय और आशुतोष दुबे ने सहभागिता की। उत्पल बनर्जी के संचालन में हुए इस संवाद में गद्य और पद्य के आपसी संबंधों तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति के विविध रूपों पर चर्चा हुई। साहित्य उत्सव 2026 के पहले दिन का समापन कालजयी लेखिका अमृता प्रीतम को समर्पित ‘मैं तैनूं फिर मिलांगी’ सत्र से हुआ। इसमें सौम्या कुलश्रेष्ठ और हरीश बुधवानी ने संगीत के माध्यम से अमृता प्रीतम की साहित्यिक संवेदना और उनकी रचनाओं को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अमिया कुंवर की कृति ‘इमरोजनामा’ के अंग्रेजी अनुवाद के आवरण का अनावरण माधव कौशिक और अक्षत गुप्ता ने किया। इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद सौम्या कुलश्रेष्ठ ने किया है।