राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।धान उत्पादक किसानों के हित में किसान गर्जना संगठन द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे आंदोलन और लगातार उठाई जा रही आवाज का असर दिखाई दिया है। भावांतर योजना को लेकर बालाघाट, सिवनी सहित धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों में लगातार आक्रोश था। किसान गर्जना संगठन ने सबसे पहले धान उत्पादक जिले बालाघाट से इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए सरकार से भावांतर योजना वापस लेने और धान की खरीदी पूर्व की तरह सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्रों के माध्यम से करने की मांग की थी।
किसानों की आवाज पहुंचाई
किसान गर्जना संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने कहा कि धान उत्पादक किसानों के लिए मंडी आधारित भावांतर व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और इससे किसान पर अतिरिक्त परिवहन एवं अन्य खर्च का बोझ बढ़ेगा।संगठन ने बालाघाट से लेकर सिवनी तक लगातार बैठकें, पत्रकारवार्ता, ज्ञापन और किसान सभाएं आयोजित कर सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाई। यही नहीं, सरकार के जनप्रतिनिधियों से भी स्पष्ट कहा गया कि धान उत्पादक किसान इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं और सरकार को किसानों की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े
प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने कहा कि किसान गर्जना ने पहले दिन से ही कहा था कि किसान की धान की खरीदी ऐसी व्यवस्था में होनी चाहिए जिसमें किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले। उसे अपनी फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े। आज सरकार द्वारा भावांतर को लेकर किए गए ऐलान को हम किसानों की आवाज की ताकत मानते हैं। उन्होंने कहा कि बालाघाट से उठी किसान की आवाज अब पूरे प्रदेश में गूंज रही है। सरकार के कई वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों के बीच जाकर उनकी नाराजगी और समस्याओं को महसूस किया है। किसान गर्जना का कहना है कि किसानों की नाराजगी को देखते हुए सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा।