वोट से विश्वास तक ज्ञानेश के सामने सबसे बड़ी परीक्षा - rashtrmat.com

        वोट से विश्वास तक ज्ञानेश के सामने सबसे बड़ी परीक्षा

  ‘वोट चोरी’ से शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग के भीतर की असहमति, डिजिटल वोटर डेटा और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ राजनीतिक विरोध का नहीं, संस्था की विश्वसनीयता का है।”  

-रमेश कुमार रिपु’

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए यह समय संक्रमण काल का है। उन पर वोट चोरी का अरोप है।बोलती बंद है। आरोप पर एतराज भी नहीं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से ज्ञानेश कुमार संदेह के दायरे में आ गए हैं। उनके खिलाफ अभी तक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वोट चोरी का अरोप लगा रहे थे। उनके आरोप को सियासी हमला मानकर खारिज करना आसान था। लेकिन पिछले दस महीने में दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह और विवेक जोशी ने 14 बार आधिकारिक आपत्ति दर्ज की। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने उनकी आपत्तियों को नजर अंदाज कर दिया। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव, अधिकारियों की डिजिटल पहुंच और मतदाता डेटा से जुड़े सॉफ्टवेयर से बताया गया है।यही वह बिंदु है जहां ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे राजनीतिक आरोप संस्थागत सवाल बन जाते हैं। रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विवाद को हवा दे दी। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े कथित हेरफेर के पीछे चुनाव आयोग की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

‘वोट चोरी’ का आरोप पहुंचा कहां

राहुल गांधी ने 2024 के हरियाणा चुनाव में कथित तौर पर 25 लाख वोटों की हेराफेरी का आरोप लगाया था और 5.21 लाख कथित डुप्लीकेट मतदाताओं का मुद्दा उठाया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। बाद की रिपोर्टों में मतदाता सूची की तकनीकी सफाई और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे।लेकिन अब असली सवाल है मतदाता सूची का डिजिटल नियंत्रण किसके पास है? मैदानी स्तर के चुनाव पंजीकरण अधिकारी की शक्तियां कितनी हैं?दिल्ली स्थित आईटी तंत्र उन अधिकारियों के फैसलों को कितना प्रभावित कर सकता है?और चुनाव आयोग के भीतर यदि दो आयुक्त किसी प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज करते हैं, तो उस आपत्ति का अंतिम निपटारा कैसे होता है? यहीं से ECINet और चुनाव आयोग की आईटी व्यवस्था चर्चा में आ जाती है।

ECINet और डॉ. सीमा खन्ना का सवाल

चुनाव आयोग की आईटी व्यवस्था की प्रमुख अधिकारी डॉ. सीमा खन्ना भी इस विवाद में चर्चा के केंद्र में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण और मैदानी अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए।ECINet को 2026 में चुनाव आयोग ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं को एकीकृत करने वाले सिस्टम के रूप में पेश किया था। लेकिन इसके बाद सवाल उठे कि क्या मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों का अत्यधिक केंद्रीकरण हो रहा है।

14 आपत्तियां और ज्ञानेश कुमार

सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 अलग-अलग मौकों पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने,हटाने, पश्चिम बंगाल में मतदाता संबंधी अपीलों और गोवा में सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं के मामले पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। दोनों आयुक्तों ने डिजिटल मतदाता डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकृत होने और मैदानी अधिकारियों की शक्तियों को प्रभावित किए जाने की चिंता भी जताई। उन्होंने कुछ मामलों में अपनी आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कुछ मामलों में कैबिनेट सचिव को भी लिखा। वैसे आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व, तारीख या सामग्री को खारिज नहीं किया।

अदालत की चुनाव आयोग पर टिप्पणी

2023 के कानून ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को रखा। वर्तमान व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब CBI निदेशक की नियुक्ति वाली समिति में CJI जैसी स्वतंत्र संवैधानिक हस्ती शामिल हो सकती है, तो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र सदस्य क्यों नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखाई भी देनी चाहिए।यह टिप्पणी सीधे ज्ञानेश कुमार को दोषी ठहराने वाला फैसला नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की चिंता व्यापक संवैधानिक बहस को जन्म देती है।

मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर

सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिकाएं दाखिल हुई हैं जिनमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित एक तरफा निर्णय लेने, Form-6 में बदलाव, ECINet के जरिए मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने के आरोपों की जांच की मांग की गई है। एक याचिका में तो मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से निलंबित करने और चुनाव आयोग के निर्णयों को अकेले लेने की शक्ति पर न्यायिक जांच की मांग भी की गई है।

क्या ज्ञानेश कुमार को हटाना आसान है?

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया बेहद कठिन है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है। इसलिए विपक्ष की राजनीतिक मांग और वास्तविक संवैधानिक हटाने की प्रक्रिया में बड़ा अंतर है।यदि अदालत के सामने यह प्रमाण आता है कि चुनाव आयोग की वैधानिक शक्तियों का उल्लंघन हुआ, निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी या किसी अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया, तो मामला अलग रूप ले सकता है।

ज्ञानेश कुमार के सामने चुनौती  

आज ज्ञानेश कुमार के सामने तीन मोर्चे एक साथ दिखाई दे रहे हैं।पहला–राजनीतिक मोर्चा। कांग्रेस और विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 28 सितंबर को कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन भी किया।

दूसरा–संस्थागत मोर्चा। चुनाव आयोग के दो सदस्यों की 14 आपत्तियों ने आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

तीसरा-न्यायिक मोर्चा। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर ज्ञानेश कुमार के कथित निर्णयों और SIR तक विभिन्न पहलुओं पर कानूनी चुनौती पहुंच चुकी है।इन तीनों मोर्चों का भविष्य अदालत, संसद और उपलब्ध दस्तावेजों से तय होगा।

वोट चोरी सिर्फ सियासी नारा नहीं

राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ आरोप अब केवल एक राजनीतिक नारा नहीं रह गया है। उस आरोप को सही या गलत साबित करने के लिए जिन दस्तावेजों, मतदाता सूचियों, डिजिटल लॉग और निर्णय प्रक्रियाओं की जांच जरूरी है, असली लड़ाई अब उन प्रमाणों को सामने लाने की है।

ज्ञानेश कुमार विपक्ष को कितना जवाब देते हैं,सवाल यह नहीं, बल्कि यह है कि क्या चुनाव आयोग देश को इतना भरोसा दिला पाता है कि मतदाता सूची में एक-एक नाम के साथ निष्पक्षता बरती गई है।क्योंकि चुनाव जीतना या हारना लोकतंत्र का परिणाम है।लेकिन चुनाव पर भरोसा बना रहना लोकतंत्र की बुनियाद है।और आज की पूरी बहस आखिरकार इसी भरोसे के इर्द-गिर्द घूम रही है।

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