ठेकेदार के लिए जनमन का मतलब सड़क निर्माण में अवैध खनन करना - rashtrmat.com

ठेकेदार के लिए जनमन का मतलब सड़क निर्माण में अवैध खनन करना

राष्ट्रमत न्यूज,वाराणसी(ब्यूरो)। बैगा बाहुल्य क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामों में आवागमन की सुविधाएँ सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से सड़क एवं पुल पुलिया के निर्माण के कार्य कराए जा रहे हैं।लेकिन ठेकेदार बैहर,बिरसा एवं परसवाड़ा में बैगा बाहुल गांवों की जमीन पर बगैर अनुमति के अवैध उत्खनन कर रहा है।वहीं सड़क निर्माण में सारी गुणवताओं को दरकिनार कर दिया गया है।


गंभीर अनियमितताएं
जनमन योजना के तहत बैहर,बिरसा एवं परसवाड़ा के अनेक बैगा बहुल गांवो को शामिल किया गया है। जहां इस योजना का उद्देश्य आदिवासी अंचलों को मुख्य मार्गों से जोड़कर सामाजिक,आर्थिक विकास को गति देना है, किंतु जमीनी स्तर पर निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं।
स्लैब कलवर्ट का निर्माण
बैहर तहसील अंतर्गत बिठली उकवा क्षेत्र में बिठली से पंडरापानी से बैगाटोला तक लगभग 1.95 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। जिसकी स्वीकृत लागत लगभग 103 लाख रुपये बताई जा रही है। जो वर्तमान में प्रगतिरत है। प्रारंभिक स्तर पर जीएसबी ग्रेनूलर सब बेस तक कार्य किया गया है। मार्ग में पड़ने वाले नालों पर पाइप कलवर्ट एवं स्लैब कलवर्ट का निर्माण जारी है। जहां उक्त कार्य मनु सुमन इंफ्रास्ट्रक्चर नामक ठेकेदार कर रहा है।
बैगा की जमीन पर खनन किया
तकनीकि दृष्टिकोण से आरोप है कि पाइप एवं स्लैब कलवर्ट निर्माण में निम्न स्तरीय सामग्री का उपयोग किया गया तथा निर्धारित मोटाई ग्रेड एवं संरचनात्मक मानकों की अनदेखी की गई। लेकिन यहां सबसे गंभीर मामला मिट्टी एवं मुरूम के अवैध उत्खनन से जुड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाली मिट्टीमुरूम का उत्खनन बिना अनुमति के किया गया है। जहां ठेकेदार ने वनभूमि, राजस्व भूमि तथा बैगा समुदाय को वनाधिकार पट्टा के तहत आंबटित भूमि से जमकर खनन किया गया है। यह न केवल खनिज नियमों का उल्लंघन है बल्कि बैगा समुदाय को प्राप्त अधिकारों का हनन भी है। इससे ठेकेदार को लाखों रुपये का आर्थिक लाभ मिला है।
बिना अनुमति के उत्खनन
इसी प्रकार प्रधानमंत्री जनमन योजना के पैकेज क्रमांक.011 अंतर्गत जालदा से भरेवाटोला तक लगभग 2.60 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। जिसकी लागत लगभग 163 लाख रुपये है। यहाँ जीएसबी एवं सीडी यक्रास डैनेज स्तर तक कार्य किया जा चुका है तथा विभिन्न नालों पर निर्माण जारी है। किंतु यहां भी इस कार्य में भी तकनीकी एवं विभागीय मापदंडों की अनदेखी की जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यहां भी निर्माण एजेंसियों द्वारा जमकर वन विभाग,राजस्व भूमि तथा बैगा समुदाय को प्रदत्त पट्टा भूमि से बिना अनुमति के व्यापक पैमाने पर उत्खनन किया गया है। कोदू नामक बैगा हितग्राही की भूमि को गहराई तक खोदकर उस जगह को तालाब का आकार दे दिया गया है। जो बारिश में किसी हादसे का कारण बन सकता है।
निर्माण कार्यो की जांच की जाए
ऐसा करने से ना सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन बिगडेगा,बल्कि वन संरचना, जल निकासी तंत्र एवं आदिवासी आजीविका पर भी विपरित प्रभाव पड़ने की आशंका है। साथ ही जलभराव, मिट्टी का कटाव तथा सड़क की भार क्षमता पर भी नकारात्मक असर संभावित है। जरूरी है कि संबंधित विभाग उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराते हुए उक्त निर्माण कार्यो को गंभीरता से ले। मामले में विस्तृत समीक्षा करे तथा दोषी ठेकेदारों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करे ताकि निर्माण कार्य के नाम पर बरती जा रही मनमानी पर रोक लगाई जा सके।

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