पानी टंकी है,नल कनेक्शन है,मगर पानी नहीं,नाले और झिरिया का पी रहें पानी - rashtrmat.com

पानी टंकी है,नल कनेक्शन है,मगर पानी नहीं,नाले और झिरिया का पी रहें पानी

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना बालाघाट के आदिवासी और बैगा   टोलों में मर गयी है। नल कनेक्शन है मगर पानी कभी उसमें आया नहीं। लोग नाले और झिरियोें का पानी पी रहे हैं जबकि जल जीवन मिशन योजना का मकसद है 2024 तक सभी गांवों तक पानी पहुंचाना। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पानी पीएचई को नहीं देना है तो फिर गांवों में पानी टंकी क्यों बनाया। नल कनेक्शन क्यों दिया।


नल कनेक्शन है पर पानी नहीं
बालाघाट जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्य पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। कागजों में गांव कवर हो चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ग्रामीणों को आज भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। जहां लोग 21वीं सदी में भी नदी.नालों, झिरियों और असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। बैहर जनपद के लहंगाकन्हार ग्राम पंचायत अंतर्गत ढूटीटोला की तस्वीर इस मिशन की असफलता का जीता जागता उदाहरण है। यहां आदिवासी बैगा परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन तो लगाए गए हैं, लेकिन वे नल केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।
नालों और झिरियों पी रहे पानी
ग्रामीणों का कहना है कि नलों में आज तक पानी नहीं आया। कई कनेक्शन अधूरे हैं, कई में अब तक टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं। लोग आज भी नालों और झिरियों का गंदा पानी पीने और दैनिक उपयोग में लाने को मजबूर हैं। ढूटीटोला के ग्रामीणों में फग्गूलाल बैगा ने यह भी बताया कि गांव में वैकल्पिक पानी टंकी का निर्माण किया गया है, लेकिन वह भी अनुपयोगी साबित हो रही है। स्थिति यह है कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। घर घर नल कनेक्शन तो लगाये गये है लेकिन उनमें कभी पानी की बूंद तक नहीं टपकी। कुछ घरों में स्थापित किये गये नल कनेक्शनों को प्लेटफार्म भी रख रखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके है। जबकि इस योजना का बालाघाट जिले के उन आदिवासी ईलाको में क्रियान्वयन समय रहते बेहद जरूरी था। जहां पानी की किल्लत है और लोग कालान्तर में पेयजल को तरसने लगते है। उन गांवो में जलापूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। ताकि किसी का कंठ ना सूखे।


नल जल योजना अधूरी है
जिले भर में जल जीवन मिशन के तहत नल जल योजना का कार्य अधूरा पड़ा है। वहीं कार्यपालन यंत्री बुद्धूलाल उईके की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गांव गांव संपर्क साधने के बाद सूत्र बताते है कि उनके गांव में कोई विभागीय टीम जांच करने या निरीक्षण करने नहीं आती। मतलब साफ है कि प्रभावित क्षेत्र के गांवो में न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है न ही अधूरे कार्यों को पूरा कराने की कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन उसका लाभ जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा।

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