राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली/ जयपुर(ब्यूरो)। राजस्थान के नगर निगम में हुए चुनावों ने देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हैरानी कर देने वाली सियासी तस्वीर ने कई सवाल भी खड़े कर दिये हैं। राजस्थान के नगर निगमों में सोमवार को हुए मेयर चुनाव के नतीजों ने निकाय चुनाव की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी। पांच नगर निगमों, उदयपुर, पाली, अजमेर अलवर और बीकानेर में मेयर पद के चुनाव हुए। आज परिणाम जारी होने के बाद इनमें से चार निगमों में भाजपा के मेयर निर्वाचित हो गए जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने बाजी मारी। सबसे दिलचस्प नतीजे पाली और अजमेर के रहे जहां वार्ड चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थीए लेकिन मेयर की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई।

पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद
65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते थे, जबकि भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। इसके बावजूद मतदान में भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। यानी कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसके पार्षदों का पूरा समर्थन मेयर उम्मीदवार को नहीं मिल सका।
अजमेर में भी बदला पूरा समीकरण
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे। बहुमत का आंकड़ा 41 था। चुनाव से पहले कांग्रेस को चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर रहना था।मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा ने बाजी मार ली। उन्हें 43 वोट मिले जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर ही सिमट गई। पार्षदों के चुनाव में बढ़त बनाने के बावजूद कांग्रेस अंतिम नतीजों में पिछड़ गई।

उदयपुर में भाजपा का स्पष्ट बहुमत
उदयपुर में तस्वीर पहले से ही साफ थी। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा ने 53 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस के 23, तीन निर्दलीय और एक माकपा पार्षद है। बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में भाजपा के पास अपने दम पर स्पष्ट बहुमत था। भाजपा केपारस सिंघवी मेयर चुने गए।
अलवर में निर्दलीयों के सहारे बनाई सरकार
65 सदस्यीय अलवर नगर निगम में भाजपा 28 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल था। कांग्रेस के 23, 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद था। बहुमत के लिए 33 वोट चाहिए थे। भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर सुमनलता अग्रवाल को मेयर बनाने में सफलता हासिल की।