ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, नहीं तो काकरोच पार्टी आंदोलन करेगी - rashtrmat.com

ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, नहीं तो काकरोच पार्टी आंदोलन करेगी

राष्ट्रमत न्यूज नई दिल्ली(ब्यूरो)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार यदि 48 घंटे के अंदर इस्तीफा नहीं दिया तो काकारोच जनता पार्टी (CJP)उनके खिलाफ देश भर में आंदोलन करेंगा। वो देश द्रोही हैं। देश भर में 13 करोड़ लोगों के नाम काटे हैं। चुन चुन कर उन्होंने नेताओं को हराने और पार्टी को खत्म करने का काम किया है।

13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट

पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़ा गद्दार हैं। उन्होंने SIR के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए। लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।

कौन वोट करेगा और कौन नहीं

दीपके ने कहा- लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं।दरअसल, बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।

क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है

CJP फाउंडर ने कहा- क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था? हमें विपक्ष या किसी खास पार्टी से कोई विशेष लगाव नहीं है। लेकिन अगर लोकतंत्र में पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दिया जाए, तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है?

देश का मूड बदल रहा

दीपके ने कहा- 2024 के चुनाव में BJP बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद वह 240 सीटों पर आ गई। इसके बाद उन्हें लगा कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मजबूत हो रही हैं।

एक-एक करके कैसे खत्म किया

दीपके के मुताबिक, चाहे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, NCP, एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी, इन सभी मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके हराया गया। यह महज संयोग नहीं हो सकता। इसमें एक पैटर्न दिखाई देता है। ये सभी 2024 में एक साथ आए थे और उन्होंने मिलकर प्रचार किया था। फिर इन्हें एक-एक करके कैसे खत्म किया गया?

केजरीवाल की सीट से 40 हजार वोट डिलीट

दीपके ने कहा- पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से 50 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 15 हजार वोटों से हार गईं। एमके स्टालिन की सीट से 1 लाख वोट डिलीट किए गए और वह करीब 45 हजार वोटों से हार गए। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से 40 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 4 से 5 हजार वोटों से हार गए।

कई फैसले  मंजूरी के बिना लिए गए

चुनाव आयुक्तों में मतभेद का खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। यह रिपोर्ट 23 सितंबर को पब्लिश की गई। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।

काम की निगरानी कर रहे थे

आयोग के फैसलों पर 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार लिखित आपत्ति जताई गईं। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं। कुछ आपत्तियां उन उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गईं, जो संबंधित काम की निगरानी कर रहे थे।

यह विवाद बिहार से जून 2025 में शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच सामने आया है। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

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