भूमिका द्विवेदी की कहानी दूध हमारे समाज का एक नंगा सच है।इस पर सोचना भी आसान…
Category: साहित्य भूमि
जिम्मेदार लेखक अपनी अनुपस्थिति से भी उपस्थित रहता है – प्रो. त्रिपाठी
राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। हाल ही में साहित्यकार, कवि विनोद कुमार शुक्ल, नासिर अहमद सिकंदर, अवधेश प्रीत और…
इंसान ही बेदखल हो जाए क्या यही नया दौर है
आज जब विकास को सड़कों, बिजली, कारखानों और मशीनी सुविधाओं से आँका जा रहा है, ऐसे…
तकनीकी विकास और विसंगतियों का परिप्रेक्ष्य
विकास के नाम पर केवल काँखने – कराहने और मुँह पटकने का कोई औचित्य नहीं हो…
चाँद चाहता था,कि धरती रुक जाए
तरुण भटनागर की कहानी में एक संदेश है। किसी समाज को खत्म करना है,तो उसकी सस्कृति…