राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय गंगवानी ने कहा कि देश के आम बजट पूरी तरह खाली था। वर्तमान समय में देश में महंगाई और बेरोजगारी और आर्थिक असमानता चरम पर है।इस बजट से देश की आम जनता,किसान,गरीब,मजदूर, महिला और युवा वर्ग को एक उम्मीद और एक आस थी कि इस बजट में वित्त मंत्री करों में राहत देने की बात करेंगी।उनके लिए कुछ खास पैकेज होगा। सरकार उनके हितों के लिए कुछ नई जनकल्याणकारी योजनाएं लेकर आएगी। देश में रोजगार सृजन का और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने का ब्लूप्रिंट लेकर आएगी।लेकिन बजट में ऐसा कुछ भी नहीं था।

कारोबारी बजट से निराश
आम जनता की जेब में सीधा पैसा डालकर उनको आर्थिक रूप से संबल देने करने का काम करेगी परंतु यह बजट आम जनता की उम्मीद और अपेक्षाओं के पूरी तरह विपरीत और निराशाजनक रहा।एक तरफ वित्त मंत्री सीतारमण जी बजट पेश कर रही थी, दूसरी तरफ शेयर बाजार ओँधे मुंह गिर रहा था।जो इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि इस बजट से देश का कारोबारी और व्यापारी बुरी तरह हताश और निराश है।
कारपोरेट घराने के लिए है बजट
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय गंगवानी ने कहा कि देश का बजट सिर्फ आय और व्यय का ब्यौरा नहीं होता,बल्कि यह वर्तमान सरकार का पालिसी डाक्युमेंटश् होता है। जो यह बताता है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार आम जनता के हितों के लिए किस प्रकार से काम करेगी। क्या ब्लूप्रिंट और क्या कार्य योजना होगी।परंतु यह बजट पूरी तरह से बिना रोडमैप का दिशाहीन और उद्देश्य विहीन बजट है। केंद्र सरकार का यह बजट विकसित भारत का बजट न होकर कारपोरेट घराने को फायदा पहुंचाने का बजट है।

बजट में छग के लिए कुछ नहीं
इस वर्ष तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में चुनाव है।इसलिए इन राज्यों में राजनीतिक फायदे और वोटो को साधने के लिए विभिन्न योजनाएं और पैकेज की घोषणाएं की गई। परंतु छत्तीसगढ़ में भाजपा के 10.10 सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं परंतु केंद्र की मोदी सरकार के सामने छत्तीसगढ़ के हितों की बात कहने का नैतिक साहस केंद्र कि मोदी सरकार के सामने इनमे नहीं है। छत्तीसगढ़ में भाजपा का डबल इंजन की सरकार का दावा फिर एक बार जुमला साबित हुआ। इसलिए इस बजट में छत्तीसगढ़ फिर एक बार खाली हाथ रह गया। छग के लिए ना कोई योजनाए ना कोई पैकेज ना कोई फायदे की बात।
आयकर में छूट बढ़ा नहीं
एक सर्वे के अनुसार देश की 86 प्रतिशत जनसंख्या चाहती थी कि आयकर छूट बेसिक लिमिट को 2.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाये। पिछले 12 सालों में इन्फ्लेशन दुगने से भी ज्यादा हो चुका है, परंतु केंद्र की मोदी सरकार 12 सालों में लिमिट 1 रूपए भी बढ़ाने के लिए तैयार नहीं।