राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। सेमरिया के कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा का हाथ इन दिनों मुर्दो पर रहता हैं। और उनके इशारे पर जिले की कांग्रेस उनके ही इर्द गिर्द घूमती है। कल्पना मिश्रा कांड की आड़ में अपनी राजनीति के लिए बलि का बकरा ढूंढ लिया। कल्पना के पिता रामशरण मिश्रा कांग्रेस के कहने पर या कहें अभय मिश्रा के कहने पर भूख हड़ताल पर बैठ गए। आखिर 14 दिन की भूख हड़ताल पर उन्हें क्या मिला। जबकि प्रियंका की मौत की न्यायिक जांच का आदेश भी हुआ। इससे पहले डाॅक्टरों और अस्तपाल के कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। अस्पताल के डीन और अधीक्षक को हटाया जा चुका है। इससे इंकार नहीं कि कल्पना के साथ अनुचित हुआ। लेकिन संवेदना को सियासी रंग देना भी अनुचित है।


जेल जाने से बच गए
अभय मिश्रा को डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला को घेरने के लिए एक मुर्दा मुद्दा मिला गया। संजय गांधी अस्तपाल के खिलाफ सियासत करने के लिए मुर्दे के अलावा भी कई ज्वलंत विषय हैं। लेकिन अभय मिश्रा को लगा कि मुर्दे पर सुर्खियों की राजनीति की जा सकती है और डिप्टी सीएम को घेरा जा सकता है।डिप्टी सीएम तो घिरे नहीं। लेििकन कां्रग्रेस ने उनकी फजीहत खूब की। भोपाल से रीवा तक अभय मिश्रा से जो बन सका उन्होंने किया। कांग्रेस ने उनका साथ दिया। और अभय को पुलिस भी उठा ले गयी। सिरमौर चैराहे से रामशरण मिश्रा को पुलिस अस्पताल भेज दी। विरोध करने अभय मिश्रा पहुंचे तो पुलिस उन्हें घसीट कर थाने ले गयी। बच गए पुलिस उन्हें जेल नहीं भेजी।

मुर्दो जैसी अभय की सियासत
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि रीवा में कांग्रेस से अकेले विधायक हैें अभय मिश्रा इसलिए कांग्रेस उनका साथ देती है। लेकिन सच्चाई यह है कि अभय मिश्रा की राजनीति में दम नहीं है। मुर्दो पर राजनीति करने से न सियासत गरमाती है और न ही प्रशासन को जूं रेंगती है। उन्होने आरोप लगा दिया कि संजय गांधी के चीरघर में सुन्दर महिलाओं की लाश के साथ रेप होता है। अरे जिसे रेप ही करना है उसके लिए सुन्दरता कोई आधार नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभय मिश्रा की जानकारी में ऐसा सच है भी तो प्रमाण लेकर आते। उसका वीडियो दिखाते।या फिर किसी नामजद लाश को लेकर सवाल उठाते। आरोप लगाने की राजनीति से आखिर किसे बदनाम करना चाहते हैं रीवा को या फिर प्रशासन को अथवा डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला को।

प्रतिभा गई, सेमरिया में समस्या खत्म
कलेक्टर प्रतिभ पाल जब तक रीवा में थी उन पर अभय मिश्रा बड़े संगीन आरोप लगाते रहे। कलेक्टर प्रतिभा पाल पैसा लेती हैं। लेकिन कभी यह नहंीं बता पाए कि किस मामले में उन्होंने पैसा लिया। उनका आरोप था कलेक्टर प्रतिभा पाल उनके विधान सभा में काम नहीं करने दे रही हैं।कलेक्टर प्रतिभा पाल के जाते ही सेमरिया विधान सभा की सारी समस्या खत्म हो गयी। सेमरिया विधान सभा में उनके घोषणा पत्र के सारे वायदे पूरे हो गए। सेमरिया विधान सभा में अगली बार कौन सा चुनावी मुद्दा उनके घोंषणा पत्र में होगा,वे खुद भी नहीं जानते।बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष ने कहा कि अभय मिश्रा को कायदे से अपने सेमरिया विधान सभा को देखना चाहिए। उनके खिलाफ सेमरिया में माहौल बन रहा है। हमारी पार्टी के लिए यह अच्छा है। मुर्दोे पर सियासत करने वाले की राजनीति भी मुर्दा हो जाती है।

सेमरिया में यह सब हो गया
अभय मिश्रा के चुनावी घोंषणा पत्र में लिखा था कि उनके विधायक बनने पर सेमरिया में छोटी लाइन रेल्वे स्टेशन की स्थापना की जाएगी। सेमरिया में इंडस्ट्रिीयल काॅरिडोर की स्थापना होगी।ककेरेड़ी मैनहा में वन्य जीव अभयारण्य का दर्जा दिलाना। सेमरिया विधान सभा के प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर रोजगार उपलब्य कराना। बनकुइयां को तहसील का दर्जा दिलाना। सेमरिया में आईटी आई स्किल सेन्टर की स्थापना। शबरी माता मंदिर को बसामन मामा के तर्ज पर विकसित करना एवं भव्य सामुदायिक भवन का निर्माण। सेमरिया बाजार के व्यापारियों की सुविधा के लिए सीसीटीवी और मुफ्त इंटरनेट उपलब्ध कराना। ऐसे अनेक वायदे थे जो मुर्दा हो गए हैं