ष्ट्रमत,न्यूज रीवा(ब्यूरो)।डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला केवल निर्माण की समीक्षा करते हैं। निर्माण में भविष्य की इंजीनियरिंग नहीं होती। यही वजह है कि 25 करोड़ की लागत से मध्यप्रदेश का पहला रिवर फ्रंट रीवा में बना, लेकिन वह नरक में तब्दील हो गया है। रीवा के बीहर नदी पर बाबाघाट से कोतवाली घाट तक बनाए गए रिवर फ्रंट में गंदगी बह रही है। रिवर फ्रंट के किनारे संचालित बेकरी का गंदा पानी यहां बह रहा है। जगह- जगह कचरा और गंदे पानी की वजह से 25 करोड़ रुपए गंदगी में तब्दील हो गया।

अपनी पीठ थपथपाते हैं
डिप्टी सीएम इंजीनियर हैं,लेकिन गंदे पानी की निकासी का व्यवस्था नहीं किये। जैसा कि वे अपने कथित विकास पर अपनी पीठ थपथपाते हैं कि हमने जगह जगह बाई पास बना दिया।उनके बाईपास की वजह से बारिश का पानी लोगों के घर में दो बरस से घुस रहा है। उनकी इंजीनियरिंग केवल चंद दिनों चमकती है और बाद में गंदी तस्वीर बन जाती है।

डेढ़ साल में ही गंदगी में तब्दील
बनाकर उसका पुर्ननिमार्ण को ही डिप्टी सीएम विकास कहते हैं। पिछले 18 साल से यही रीवा में हो रहा है। अनियोजित विकास हमेशा जनहित में नहीं होता। गौरतलब है कि राज्यपाल मंगू भाई 10 नवम्बर 2024 को मध्यप्रदेश का पहला रिवर फ्रंट का लाकार्पण किया था।1600 मीटर का रिवर फ्रंट बनाया गया था।इसमें ग्रेविटी वाल,पाथवे,ग्रीन टी एरिया का निर्माण किया गया। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने दावा किया था कि अहमदाबाद और गोमती रिवर फ्रंट के बाद बीहर रिवर फ्रंट की पहचान स्थापित होगी।डेढ़ साल में यह गंदगी में तब्दील हो गया। गंदा पानी बहने की वजह से यहां नहीं चला जा सकता। यह डिप्टी सीएम का ऐसा ताजमहल है,जो उनके अनियोजित विकास की गाथा स्वयं कहता है। ऐसा निर्माण किस काम का जिसमें पानी निकासी की व्यवस्था न हो।

बेकरी सेंटरों ने गंदा कर दिया
रीवा में शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया बीहर नदी के तट पर रिवर फ्रंट अब गंदे पानी और कीचड़ की समस्या से जूझ रहा है। रिवर फ्रंट के आसपास संचालित बेकरी सेंटरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे रिवर फ्रंट की ओर बह रहा है। हालात ये हैं कि गंदा पानी अब लोगों के टहलने वाले पथ तक पहुंच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे यहां घूमने आने वाले लोगों को परेशानी के साथ-साथ संक्रमण और दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।

कहती है तस्वीर दूसरी कहानी
रीवा की खूबसूरती बढ़ाने और लोगों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 25 करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया रिवर फ्रंट…लेकिन तस्वीरें इसकी दूसरी ही कहानी बयां कर रही हैं।रिवर फ्रंट के आसपास कई जगह कीचड़ और गंदा पानी जमा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास संचालित बकरी सेंटरों से निकलने वाला गंदा पानी बहकर रिवर फ्रंट तक पहुंच रहा है।

पानी निकासी की व्यवस्था नहीं
हालात अब इतने खराब हैं कि गंदा पानी लोगों के टहलने वाले पथ तक पहुंच चुका है। यहां सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग घूमने और टहलने आते हैं, ऐसे में गंदे पानी से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना हुआ है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पानी की निकासी की समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया।बेकरी सेंटर संचालकों का कहना है कि रिवर फ्रंट के निर्माण के बाद पानी की निकासी का रास्ता प्रभावित हो गया है। उनके मुताबिक, पानी निकासी की कोई दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूरी में यह पानी रिवर फ्रंट की तरफ जा रहा है।

जिम्मेदारी आखिर किसकी
यानी सवाल सिर्फ गंदे पानी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है, जिस पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए गए।अगर रिवर फ्रंट के आसपास जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है?क्या नगर निगम और संबंधित विभाग इस गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान करेंगे?करोड़ों का रिवर फ्रंट… लेकिन गंदगी और गटर के पानी के बीच टहलने को मजबूर शहरवासी।सवाल यही—खूबसूरती पर खर्च हुए करोड़ों, फिर निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं