राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। जिले के तिरोड़ी संकुल अंतर्गत जिला पंचायत के अधीन संचालित शासकीय बावनथड़ी गुरुकुल हाई सेकेंडरी विद्यालय जर्जर होने के साथ ही स्कूल में गणित,विज्ञान और कृषि विषय पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं है। 365 विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में है।

गणित,विज्ञान,कृषि के शिक्षक नहीं
ग्रामीणों और बच्चों के अनुसार विद्यालय में नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक कृषि, विज्ञान, गणित और कला संकाय की पढ़ाई संचालित होती है। वर्ष 2018 से यह विद्यालय जिला पंचायत बालाघाट के अधीन है। आसपास के हरदोली, बोनकट्टा,बम्हनी, आॅजनबिहारी, दिग्धा, चाकहेटी सहित कई गांवों के छात्र.छात्राएं प्रतिदिन 8 से 10 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में कोई अन्य हाई सेकेंडरी विद्यालय नहीं है। यही एकमात्र विकल्प है। वर्तमान में नर्सरी से पांचवीं तक केवल तीन शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि कक्षा 6वीं से 8वीं तक एक भी नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए केवल दो शिक्षक उपलब्ध हैं। ऐसे में विज्ञान, गणित, कृषि और अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
जर्जर स्कूल भवन से खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 40 वर्ष पुराना भवन अब पूरी तरह जर्जर और जीर्णशीर्ण हो चुका है। बरसात के दिनों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा बना रहता है। इसके अलावा विद्यालय में शुद्ध पेयजल,पर्याप्त फर्नीचर और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी समस्याओं से शासन और प्रशासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
प्राचार्य का दो दिन का वेतन काटें
अभिभावक और बच्चे जनसुनवाई में पहुंचे तो कलेक्टर कुमार सत्यम ने छात्राओ के कक्षा छोडकर जनसुनवाई में आने को लेकर नाराजगी जताई और उन्होंने छात्राओ को वापस स्कूल जाने कहा। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी धनश्री जैन को निर्देशित किया कि शाला के समय में छात्राओ को जनसुनवाई में भेजने वाले विद्यालय के प्राचार्य का 02 दिन का वेतन काटने की कार्यवाही करें। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को छात्राओ द्वारा बतायी गई समस्याओ का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिये और यह भी सुनिश्चित करने कहा कि शाला के समय में कोई भी छात्र छात्रा जोखिम उठाकर जनसुनवाई आदि में न आए।