खाना कम पड़ने पर कलेक्टर CEO पर भड़के,फिर अनलिगल ये कर दिया - rashtrmat.com

खाना कम पड़ने पर कलेक्टर CEO पर भड़के,फिर अनलिगल ये कर दिया

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बनारस से वडनगर के लिए प्रारंभ हुई सेवा संकल्प यात्रा त्योंथर पहुंची। त्योंथर सीईओ ने इनके लिए खाने की व्यवस्था मीनू के आधार पर डेढ़ सौ लोगों के लिए किया।पहुंच गए ढाई सौ लोग। खाना कम पड़ गया। इसी बात पर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी भड़क गए। उन्होंने त्योंथर सीईओ प्रवीण बासोर को निलंबित करने की अनुशंसा कर दी। जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख ने निलंबित करने की फाइल को कमिश्नर तक भेजने से इंकार कर दिया।

इतनी आवभगत क्यों?

सोचने वाली बात है कि सेवा संकल्प अभियान दल के ढाई सौ बाइक में पेट्रोल की व्यवस्था भी सीईओ को ही करना है।सवाल यह है कि खाना,ठहरना और पेट्रोल की व्यवस्था क्या कलेक्टर अपनी जेब से किये हैं। नहीं। फिर सीइओ पर आग बबूला किस अधिनियम के तहत हो गए। सरकारी कार्यक्रम था नहीं। फिर बनारस से आने वाला दल मंत्री नहीं हैं।इतनी आवभगत क्यों?


एसी कमरा नहीं मिलने पर भड़के
जिले में यात्रा के तीन -चार दलों ने अलग-अलग स्थानों पर सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों को परेशान कर दिया। जवा में जहां अभियान के लोगों को ठहराया गया था वहां एसी नहीं था। भड़क गए। जवा में एसी वाला होटल है नहीं। कलेक्टर देर रात तक रूके रहे। सवाल यह है कि बीजेपी के इस तरह के अनर्गल कार्यक्रम से जनता को क्या मिल जाएगा। सीईओ ऐसे कार्यक्रमों के लिए पैसा अपने घर से खर्च तो करेंगे नहीं। डिप्टी सीएम कहते हैं सरकार के पास पैेसे की कमी नहीं है। भले कर्जा गले तक है। बीजेपी के ऐसे अनुचित आयोजनों की भी व्यवस्था सरकार अधिकारियों पर क्यों थोप रही है।


लाखों खर्चा होते हैं आए दिन
डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के रीवा आने पर तीन- चार कार्यक्रम आए दिन होते हैं। जाहिर सी बात है जिस विकास खंड में होता है उसकी व्यवस्था में सारा खर्चा उस जनपद के सीईओ को ही उठाना पड़ता है।  यानी बीजेपी के हर कार्यक्रम में लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है। एक भूमि पूजन में ही सैकड़ो बीजेपी के लोग पहुंच जाते हैं। उनके नाश्ते से लेकर कुर्सी पंडाल,चाय आदि की व्यवस्था जरूरी है।छत्तीसगढ़ में ऐसे कार्यक्रम की व्यवस्था के खर्चे का इंतजाम मंत्री और विधायक स्वयं करते हैं। फिर यहां क्यों नहीं।
अफसर कार्यकर्ता बन गए
मध्यप्रदेश में बीजीपी की सरकार की वजह से सरकारी अफसर पार्टी का कार्यकर्ता बनकर रह गए हैं। कोई भी बीजेपी का कार्यक्रम हो तो अफसरों को ही आयोजन के खर्चे की व्यवस्था करना जरूरी है। किसी भी जनपद का सीईओ बीजेपी के किसी नेता या मंत्री या फिर कार्यकर्ता का कोई आयोजन है तो पंडाल से लेकर चाय नास्ता खाने का सारे खर्चा की जिम्मेदारी उसकी। कोई सरकारी बजट प्रशासन की तरफ से मुहैया नहीं होता। न ही सरकार की तरफ से। इसी से समझा जा सकता है कि सीईओ अपनी जेब से खर्चा करने से रहा। यदि आयोजन में कुछ कमी रह गयी या फिर बीजेपी का अदना सा कार्यकर्ता कलेक्टर से शिकायत कर दे तो वो भूल जाते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए।


क्या बेटी की बारात में आए थे
बीजेपी के कार्यकर्ता क्या सीईओ की बेटी की बारात में आए हैं या फिर बेटे की बारात में। आम लोगों का कहना है कि डिप्टी सीएम को चाहिए कि उनके जिले में आयोजन में कमी हो जाने पर बेइज्जती किसी कर्मचारी और अधिकारी की न हो। कलेक्टर की भाषा में संस्कार नहीं दिखते,अपने से छोटे कर्मचारियों के प्रति। कलेक्टर को भी अपने पद की गरिमा को समझना चाहिए।

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