राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। बालाघाट जिले के सभी 600 पटवारी बुधवार से तीन दिनों की सामूहिक छुट्टी पर चले गए हैं। पटवारी संघ के पूरे प्रदेश में किए जा रहे इस आंदोलन की वजह से तहसील दफ्तरों में जमीन-जायदाद और राजस्व से जुड़े सारे काम ठप पड़ गए हैं।मुख्यालय के तहसील कार्यालय में पटवारियों का कमरा तो खुला रहा, लेकिन उनकी कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। पटवारियों ने सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। पटवारियों ने इस आंदोलन की जानकारी पहले ही ज्ञापन देकर अफसरों को दे दी थी।

पटवारियों में काफी नाराजगी
पटवारी शिफिल धमगाए ने बताया कि वे अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार से गुहार लगा रहे हैं। नवंबर 2025 में उन्हें महाधिवेशन बुलाने और समस्याओं को हल करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इससे प्रदेशभर के पटवारियों में काफी नाराजगी है।

7 दिनों का अल्टीमेटम और चेतावनी
पटवारियों ने सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी, तो यह आंदोलन और उग्र किया जाएगा।पटवारियों के कैडर का रिव्यू किया जाए, उन्हें प्रमोशन का मौका मिले और समयमान वेतनमान दिया जाए। हाल ही में हुए प्रमोशनों में पटवारियों को शामिल न किए जाने से वे इसे अपने साथ भेदभाव मान रहे हैं।नायब तहसीलदार के लिए विभागीय परीक्षा जल्द कराई जाए और पटवारियों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो।काफी समय से रुके हुए वित्तीय भुगतानों को तुरंत किया जाए और संघ के पदाधिकारियों के गलत तरीके से किए गए तबादले रद्द हों।

बारिश में काम हो रहा प्रभावित-छबि पंत
तहसीलदार छबि पंत का कहना है कि अभी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे समय में प्राकृतिक आपदा, कानून-व्यवस्था और राजस्व के कामों के लिए पटवारी प्रशासन की बहुत अहम कड़ी होते हैं। पटवारियों की हड़ताल से इन कामों पर बुरा असर पड़ रहा है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।