राष्ट्रमत न्यूज,रीवा/नई दिल्ली (ब्यूरो)। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रघान ने नई दिल्ली में एक पेड़ मां के नाम अभियान शुरू किया था। मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने उसी तर्ज पर रीवा में कई पेड़ लगाए। वैसे रीवा को हरा भरा करने के नाम पर उन्होंने पन्द्रह सालों में करोड़ों रुपए बर्बाद किये और अपने लोगों को मालामाल किया। सन् 2025 में रीवा में 6लाख बीस हजार पेड़ रिकार्ड के अनुसार लगे। जिसमें 12 हजार फलदार पेड़।

कितने सूख गए बताएं डिप्टी CM
आज की तरीख में कितने पेड़ जिंदा हैं,नगर निगम केा और डिप्टी सीएम को पता नहीं।डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला जो पेड़ लगाए उसमें एक भी जिंदा नहीं है। उन्होंने रीवा को हरा भरा दिखाने के लिए कई प्रयोग किये। रीवा को प्रयोग शाला बना दिया। अब भ प्रयोग करते आ रहे हैं। पहले कनेर के पेड़ सड़कों के बीचो बीच लगवाए।शहर के अनेक चैराहों में खजूर के पेड़ लगवाए। वो सब कहां गए उन्हें भी याद नहीं होगा। अस्पताल चौराहा ,सिरमौर चौराहा और काॅलेज चौराहा आदि स्थानों में अब हरियाली नहीं है। केवल कंक्रीट की इमारतें हैं।रीवा वाले कहते हैं समदड़िया के साथ उनकी पाटर्नरशिप है।
रीवा का तापमान 45 डिग्री
डिप्टी सीएम ने विकास के नाम पर रीवा का तापमान 45 डिग्री कर दिये। कंक्रीट की इमारतें बनवाकर और पेड़ों की बलि लेकर। बड़े बड़े पेड़ जमीदोज कर दिये गए।जबकि उन्हें शिफ्ट किया जा सकता था।रीवा का पर्यावरण को बिगाड़ने में डिप्टी सीएम ने कोई कसर नहीं छोड़ा। 15 साल पहले रीवा का तापमान 45 डिग्री नहीं था।गनीमत है कि रीवा में जंगल नहीं है,वरना एक पेड़ मां के नाम और सारे पेड़ अडानी के नाम हो गए होते। जैसे सीधी और छत्तीसगढ़ में। बस्तर में छह लाख पेड़ अडानी के काट दिये। रायपुर,बिलासपुर,रायगढ़ का तापमान इस साल पिछले साल की तुलना में दो डिग्री बढ़ गया है।

देश में दस करोड़ पौधे लगे
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रघान ने नई दिल्ली में एक पेड़ मां के नाम अभियान पर पांच जून 2025 को एक विशेष माॅड्यूल और वेबसाइट का शुभारंभ भी किया था।विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून से लेकर 30 सितम्बर तक व्यापक स्तर पर पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया गया था। जिसमें देश भर में करीब दस करोड़ पेड़ लगाए गए। इसमें से मुश्किल से दस हजार पेड़ जिंदा हैं। बाकी सब मर गये।
डेढ़ लाख पौधे पुरानी जगह पर लगे
मध्यप्रदेश के रीवा जिले में वर्ष 2025 में एक पेड़ माँ के नाम और अमृत महाहरित अभियान सहित विभिन्न वन महोत्सव कार्यक्रमों के तहत 6 लाख से अधिक पौधे रोपने का लक्ष्य तय किया गया था। वन विभाग और स्थानीय निकायों जैसे नगर निगम रीवा द्वारा कुल 6 लाख 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य में 4 लाख 60 हजार से अधिक नए पौधे लगाना और लगभग 1 लाख 50 हजार पुराने पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाना शामिल था।

इस बार फिर डिप्टी CM जाएंगे
शहरी वृक्षारोपण अमृत महा हरित अभियान के तहत रीवा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 12 हजार से ज्यादा पौधे लगाने की योजना थी जिसमें फलदार पौधे भी शामिल किए गए।प्रमुख स्थान रतहरा.चोरहटा मार्ग अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर लक्ष्मणबाग पोषण वन और पशु चिकित्सा महाविद्यालय के किनारे रिक्त भूमि पर सघन वृक्षारोपण किया गया।डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला पांच जून को इस बार फिर वहीं पेड़ लगाने जाएंगे जहां 2024,2025 में गए थे। इसलिए कि उन्हें पुराने पौधों की जगह नए पौधे लगाने हैं। लेकिन यह नहीं देखेंगे कि उनके लगाए कितने पौधे जिंदा हैं।
संरक्षण जरूरी है-सर्जेश
बीजेपी नेता सर्जेश पांडेय कहते हैं कि पौधरोपण तो सरल है परन्तु संरक्षण और पालन कठिन है।जब तक संरक्षण और पालन की पूर्व से मुकम्मल व्यवस्था न हो तो पौधा रोपण औचित्यहीन है।पशुपालकों की मनमानी से निराश्रित पशुओं का सड़कों और खेतों में हूजूम वृक्षारोपण को नष्ट करता है। वहीं बरसात के महीने में अपने आप प्राकृतिक रूप से उगने वाले असंख्य औषधीय, फलदार और प्राकृतिक संतुलन बनानें वाले पौधों को भी यह अवारा पशु नष्ट कर देते हैं। जिससे वृक्षों का अस्तित्व मिट जाता है और गंभीर प्राकृतिक असंतुलन पैदा हो रहा है।यह वानस्पतिक पारिस्थितिकी तंत्र को अत्यंत नुकसान पहुंचा रहा है।प्राकृतिक रूप से उगनें वाले पौधे,वृक्ष पर्याप्त होते हैं। इसलिए सबसे बड़ा काम पशुपालकों की मनमानी पर सख्ती से अंकुश लगाकर आवारा पशुओं को नियंत्रित करने का है।