कुत्तों की मौत मर रहे कान्हा में बाघ,एक माह में आठ मरे - rashtrmat.com

कुत्तों की मौत मर रहे कान्हा में बाघ,एक माह में आठ मरे

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।कान्हा नेशनल पार्क इस समय बाघों की मौत को लेकर सुर्खियों में है। यहां बाघों की मौत कभी भूख से तो कभी क्षेत्रीय वर्चस्व तो कभी शिकारियों की वजह से। लगातार हो रही बाघों की मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। साथ ही कान्हा प्रबंधन की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।


भूख से मरा बाघ
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला सरही परिक्षेत्र से शुरू हुआ। 21 अप्रैल को अमाही नाला के पास 16 माह के एक नर बाघ शावक का शव बरामद किया गया। पोस्टमार्टम में उसका पेट पूरी तरह खाली मिला। जिसके बाद भूख से मौत की आशंका जताई गई। इस घटना ने पूरे वन विभाग को झकझोर दिया था। लेकिन इसके बाद भी मौतों का सिलसिला नहीं थमा। दो दिन बाद 23 अप्रैल को एक अन्य नर शावक की मौत की खबर सामने आई। उसी दिन जत्ता बीट क्षेत्र में भी एक नर बाघ का शव बरामद हुआ। इसके बाद 25 अप्रैल को तीसरे मादा शावक का शव मिला। वक्त बीता और 29 अप्रैल को मुक्की रेंज में 10 वर्षीय मादा बाघ और उसके डेढ़ वर्षीय नर शावक की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में संक्रमण और बाद में श्वानों में पाए जाने वाले केनाइन वायरस के संपर्क में आने की पुष्टि हुई।
बाघों के बीच संघर्ष
केनाइन वायरस मिलने पर यह सवाल उठने लगे कि आखिर जंगल के भीतर संक्रमण इतना तेजी से कैसे फैल गया और समय रहते इसकी रोकथाम क्यों नहीं हो सकी? इन सवालों का जवाब मिला भी नहीं था कि 4 मई 2026 को पुनरू कान्हा नेशनल पार्क के किसली जोन में प्रसिद्ध बाघ डिगडोला की भी एक बाघ की मौत हो गई। जहां वन विभाग ने इसे क्षेत्रीय संघर्ष का मामला बताया था। लेकिन लगातार हो रही मौतों ने यह साफ कर दिया कि जंगल में बाघों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है।


उपचार से पहले मौत
अब ताजा मामला कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र की मोहगांव बीट का है। जहां सुबह एक नर बाघ का शव बरामद हुआ। मृत बाघ की पहचान टी.220 उर्फ महावीर मेल के रूप में हुई है। गश्ती दल ने बाघ को घायल और अस्वस्थ हालत में देखा था, लेकिन उपचार के प्रयास शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार बाघ की निगरानी क्षेत्र संचालक और वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम द्वारा की जा रही थी। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों डाॅ संदीप अग्रवाल,डाॅ.आशीष वैद्य और डाॅ ज्योति मरावी की टीम ने बताया कि 5 से 6 वर्षीय इस बाघ के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं और उसके फेफड़ों में गंभीर संक्रमण पाया गया है। चिकित्सकों ने संक्रमण को मौत का संभावित कारण माना है। फारेंसिक जांच के लिए विसरा सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं। अधिकारियों ने शिकार की संभावना से इनकार किया है। बाघ के शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग जैसे नाखून,केनाइन दांत और मूंछ के बाल सुरक्षित पाए गए हैं। डाग स्क्वाड को घटनास्थल की जांच में भी कोई संदिग्ध गतिविधि के साक्ष्य नहीं मिले। एनटीसीए प्रोटोकाल के तहत पोस्टमार्टम के बाद बाघ का दाह संस्कार कर दिया गया।
वन प्रबंधन की विपफलता
सवाल यह है कि एक माह में 08 बाघों की मौत को सामान्य घटना मानना क्या उचित होगा। कान्हा टाइगर रिजर्व में यदि लगातार संक्रमण, भूख और आपसी संघर्ष से बाघ मर रहे हैं तो यह वन प्रबंधन की गंभीर विफलता की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में शिकार की उपलब्धताए बाघों की बढ़ती संख्या के अनुपात में क्षेत्र प्रबंधनएबीमारियों की मानिटरिंग और वन्यजीवों के स्वास्थ्य परीक्षण पर और अधिक प्रभावी कार्य करने की जरूरत है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते संक्रमण और संघर्ष की वजहों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो कान्हा में बाघ संरक्षण की छवि को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। जंगल के राजा की लगातार हो रही मौतें अब केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।