ओम बिड़ला के खिलाफ 118सांसदों के अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस - rashtrmat.com

ओम बिड़ला के खिलाफ 118सांसदों के अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस

 राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)।  कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इसमें 118 सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है।’

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नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया

स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा सेक्रेटरी जनरल उत्पल कुमार सिंह को विपक्ष द्वारा उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए दिए गए नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया। लगभग 120 विपक्षी सांसदों ने बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया था, क्योंकि उन्होंने नेता विपक्ष (LoP) राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी थी, साथ ही आठ सांसदों को सस्पेंड करने का भी नोटिस दिया था।

 PM पर हमला का सवाल ही नहीं उठता-प्रियंका

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि पीएम पर कोई हमला करे सवाल ही नहीं उठता। सरकार द्वारा स्पीकर पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इस बीच भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। सांसद वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाते रहे। इसके बाद सदन 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।हंगामे के बीच संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों से हाथ जोड़कर कहा कि बजट पर चर्चा होने दें। इससे हम सबका नुकसान हो रहा है। आप रोज आकर हंगामा करते हैं। ऐसे में काम नहीं हो पा रहा।दोपहर 2 बजे कार्यवाही शुरू हुई। स्पीकर की चेयर पर ओम बिरला की जगह केपी तेनेट्टी आए। उन्होंने विपक्ष से शशि थरूर को आम बजट पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा।

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दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज की

राहुल का यह बयान पब्लिशिंग कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के उस क्लैरिफिकेशन के बाद आया, जिसमें कहा गया कि नरवणे की किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है। पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं।पेंगुइन कंपनी ने कहा- अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई है। हमारी तरफ से किताब का कोई भी हिस्सा कहीं भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।कंपनी की सफाई इसलिए आई, क्योंकि बुक की अनअथॉराइज्ड कॉपियों के लीक और ऑनलाइन सर्कुलेशन का दावा है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज की है।

 बीजेपी यूपी से बाहर हो जाएगी

अखिलेश यादव ने कहा कि मां गंगा को बर्बाद कर दिया है। जब गंगा उल्टी बहेगी तो आप यूपी से बाहर हो जाएंगे। यमुना को भी गंदा कर दिया है। दिल्ली से बहकर यूपी में जाती है और अन्य नदियों को भी गंदा कर देती है। ये कहीं काम नहीं कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अगर सबसे अच्छा रिवर फ्रंट कहीं बना है तो लखनऊ में बना है। कोई दूसरी जगह की बात करता है तो मैं उससे कहूंगा कि लखनऊ आकर देखे।

लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

  • लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के कार्यप्रणाली नियमों के अनुच्छेद 200 के तहत संचालित होती है।
  • कोई भी सदस्य जो स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाना चाहता है, उसे लोकसभा महासचिव को लिखित रूप में प्रस्ताव सौंपना पड़ता है।
  • इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे आरोपों को स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखा जाना, जिसमें कोई तर्क, अनुमान, व्यंग्य, आरोप या अपमानजनक बातें शामिल न हों।
  • नोटिस मिलने के बाद, प्रस्ताव पेश करने की अनुमति के लिए संबंधित सदस्य के नाम पर कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
  • प्रस्ताव की चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तिथि से कम से कम 14 दिन बाद होती है।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों (सांसदों) का समर्थन प्राप्त होना चाहिए, अन्यथा यह गिर जाता है।
  • आमतौर पर, प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर बहस और मतदान होता है। जब प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर या उप-स्पीकर अध्यक्षता नहीं कर सकते।
  • अंत में, प्रस्ताव को सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित होना जरूरी है।