राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। राजधानी रायपुर में नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति को लेकर एक बड़ी और अहम बैठक हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है। बीजेपी की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। छत्तीसगढ़ के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा को गति देते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। इस हाईलेवल मीटिंग में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा भी शामिल हुए।बैठक में वामपंथी उग्रवाद की वर्तमान स्थिति और नक्सलवाद को खतम करने के रोडमैप पर चर्चा की गई। दरअसल, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं।

शाह ने एक्स पर जानकारी दी
शाह ने एक्स पर जानकारी शेयर करते हुए लिखा कि-आज रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार और अधिकारियों के साथ नक्सलविरोधी अभियानों पर समीक्षा बैठक की। सिक्योरिटी सेंट्रिक स्ट्रेटजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम आए हैं।इस 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है। शाह ने आगे लिखा- जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। यहां के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक और टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय की गई डेडलाइन से पहले अंतिम बैठक मानी जा रही है। बैठक में डेडलाइन के भीतर नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए स्पष्ट और ठोस एक्शन प्लान पर चर्चा हुई। इस बैठक में देश के कई नक्सल प्रभावित राज्यों के गृह सचिव, डीजीपी, एसीएस गृह, सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।
नक्सली खात्मे के 51 दिन शेष
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन को 51 दिन बाकी हैं। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा अहम माना जा रहा है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन है। तो अब नजदीक आ चुकी है। इस डेडलाइन का ऐलान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल लगातार ऑपरेशन चला रही है। इस डेडलाइन में अब करीब 51 दिन ही बाकी हैं।

बस्तर एरिया पर खास फोकस
बैठक में छत्तीसगढ़ में नक्सल गतिविधियों की स्थिति और बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और विकास दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।अधिकारियों के साथ नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने, उनके सप्लाई चैन और स्थानीय समर्थन को खत्म करने पर विचार किया गया। साथ ही नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए आत्मसमर्पण नीति को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
गांवों में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर
नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर भी बैठक में सहमति बनी। सरकार का मानना है कि विकास से ही नक्सलवाद की जड़ कमजोर होगी।नया रायपुर स्थित होटल में आयोजित बैठक में बस्तर को आदिवासी संभाग के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया गया।
देशभर के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनआईए के महानिदेशक और छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, झारखंड व तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।