खेती भी समृद्धि के द्वार खोलती है,बशर्ते एक ही फसल पर भरोसा न करें - rashtrmat.com

खेती भी समृद्धि के द्वार खोलती है,बशर्ते एक ही फसल पर भरोसा न करें

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। अक्सर रिटायरमेंट के बाद लोग आराम और सीमित दिनचर्या अपना लेते हैं,लेकिन बालाघाट जिले के सेवानिवृत्त शिक्षक हरीश सुलखे के लिए खेती बेहतर विकल्प है। वे कहते हैं अब खेती घाटे का सौदा नहीं रही। जरूरी है कि व्यक्ति को एक ही फसल के भरोसे नहीं रहना चाहिए।उनकी दिनचर्या यह बताती है कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई शुरूआत हो सकती है।


एक ही फसल से जोखिम बढ़ता है
हरीश सुलखे का कहना है कि खेती से उनका जुड़ाव बचपन से रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज किसान रहे हैं और वे बचपन से ही खेतों में काम देखते और करते आए हैं। नौकरी के दौरान समय की कमी जरूर रही,लेकिन छुट्टियों और खाली समय में वे खेती से जुड़े रहते थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें खेती को पूरी तरह समय देने का अवसर मिला। शुरूआती दौर में खेती को दोबारा व्यवस्थित करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि सिंचाई व्यवस्था, फसल चयन और बाजार की समझ विकसित करना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज,जैविक खाद और फसल चक्र प्रणाली को अपनाकर उत्पादन में सुधार किया। मौसम में हो रहे बदलाव और लागत बढ़ने की समस्या से निपटने के लिए वे विविध खेती पर जोर देते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने साग.सब्जी, फल फूल और गन्ना की खेती के साथ मुर्गी पालन और मछली पालन की शुरूआत की। उनका कहना है कि एक ही फसल पर निर्भर रहने से जोखिम बढ़ता है,जबकि विविध गतिविधियों से आय संतुलित रहती है।


अब खेती घाटे का सौदा नहीं
हरीश सुलखे बताते हैं कि मिश्रित खेती से उनकी आय में अपेक्षित बढ़ोतरी हुई है और अब खेती घाटे का सौदा नहीं रही। वे नए किसानों को सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन और मछली पालन जैसी कम लागत वाली गतिविधियों को अपनाने की सलाह देते हैं। खेती में उनके परिवार की अहम भूमिका है। परिवार के सदस्य हर स्तर पर सहयोग करते हैंए जिससे काम आसान हो जाता है। उनका मानना है कि परिवार का साथ न मिले तो खेती जैसे कार्य को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है। उनके प्रयासों का असर गांव में भी देखने को मिल रहा है। कई लोग उनसे प्रेरणा लेकर खेती की ओर लौट रहे हैं और उनसे सलाह भी ले रहे हैं।


खेती बेहतरीन विकल्प
युवाओं को संदेश देते हुए हरीश सुलखे कहते हैं कि खेती को नकारात्मक दृष्टि से न देखें। सही योजना और मेहनत से खेती सम्मानजनक आजीविका का साधन बन सकती है। उनका मानना है कि रिटायरमेंट के बाद खेती एक बेहतरीन विकल्प है, जो न सिर्फ आय देता है बल्कि व्यक्ति को सक्रिय और स्वस्थ भी रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि विभाग की योजनाओं,तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से उन्हें काफी मदद मिली है। भविष्य में वे खेती को और उन्नत करने के साथ.साथ अपने अनुभवों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के रूप में अन्य किसानों के साथ साझा करना चाहते हैं।रिटायर शिक्षक हरीश सुलखे आज न केवल सफल किसान हैं, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी दे रहे हैं कि मेहनतए अनुभव और इच्छाशक्ति से किसी भी उम्र में नई राह बनाई जा सकती है।