जहां डर था, अब किताबें हैं: जीड़पल्ली में शिक्षा की नई शुरुआत - rashtrmat.com

जहां डर था, अब किताबें हैं: जीड़पल्ली में शिक्षा की नई शुरुआत

 राष्ट्रमत न्यूज,बीजापुर(ब्यूरो)। दशकों तक अभाव, असुरक्षा और हिंसा के साए में जीवन गुजारने वाले उसूर विकासखंड के अत्यंत सुदूर अंदरूनी क्षेत्र जीड़पल्ली के नौनिहालों के लिए अब शिक्षा की नई सुबह हुई है। कभी जहां झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे थे, वहां आज एक पक्का, सुरक्षित और सुसज्जित विद्यालय भवन खड़ा है, जो उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनकर सामने आया है।
एक बड़ा संदेश दिया
करीब 20 वर्षों से प्राथमिक शिक्षा के अभाव का दंश झेल रहे इस क्षेत्र में प्राथमिक शाला के पुनः संचालन और नवीन भवन के निर्माण को एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। नियद नेल्लनार अभियान के तहत जिला प्रशासन ने न केवल विद्यालय भवन का निर्माण कराया, बल्कि अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक बड़ा संदेश भी दिया है।
पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ
नवीन विद्यालय भवन का विधिवत शुभारंभ ग्राम सरपंच, उपसरपंच, पंच, पेरमा पुजारी, शिक्षकगण एवं ग्रामीणजनों की गरिमामयी उपस्थिति में पूजा-अर्चना के साथ किया गया। प्राथमिक शाला जीड़पल्ली, संकुल केंद्र धरमारम के इस नए भवन के उद्घाटन अवसर पर संकुल प्राचार्य पामेड, संकुल समन्वयक धरमारम, शिक्षक, विद्यार्थी, ग्राम के पुजारी, पेरमा, गायता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
  सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन के निर्माण से बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षा के प्रति रुझान भी मजबूत होगा। पक्के भवन, पर्याप्त कक्ष और सुरक्षित परिसर मिलने से बच्चों को अब अस्थायी झोपड़ी के बजाय सम्मानजनक वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा।
अंदरूनी क्षेत्रों में विकास की रोशनी
जिला प्रशासन द्वारा नियद नेल्लनार अभियान के अंतर्गत अंदरूनी एवं संवेदनशील इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जीड़पल्ली का यह विद्यालय भवन उसी प्रयास का जीवंत उदाहरण है। कभी जहां शिक्षा पहुंचना चुनौती था, वहां आज विकास और विश्वास की रोशनी पहुंच चुकी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा ही क्षेत्र में स्थायी बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है। यह स्कूल भवन न केवल बच्चों के भविष्य को संवारेगा, बल्कि पूरे गांव के विकास की दिशा भी तय करेगा।