देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई पीढ़ी ही पूरा करेगी - राज्यपाल - rashtrmat.com

देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई पीढ़ी ही पूरा करेगी – राज्यपाल

 राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। प्रदेश के राज्यपाल तथा विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति  मंगूभाई पटेल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के तेरहवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की। समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह को डी लिट तथा प्रसिद्ध हृदय रोग सर्जन डॉ युगल किशोर मिश्रा को डीएसई की मानद उपाधि प्रदान की गई। समारोह में राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि नई शिक्षा नीति में देश के प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को समाहित करके नवीन विज्ञान से जोड़ा गया है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय इस नीति पर चलते हुए ज्ञान के नए दीपक जला रहा है। नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा प्रणाली को भारतीयता की दिशा दे रही है। इससे विद्यार्थियों को ज्ञान-विज्ञान और तनाव मुक्त जीवन की शिक्षा मिल रही है।

जिम्मेदारी नई पीढ़ी पर ही है
राज्यपाल ने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को कुलगुरू द्वारा दीक्षांत शपथ दिलाई गई। इसे आत्मसात करें तथा जीवन का उद्देश्य बनाएं। प्रधानमंत्री  मोदी जी ने 2047 तक देश को विश्वगुरू और आधुनिकतम विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। नई पीढ़ी अपनी प्रतिभा, लगन और देशभक्ति से प्रधानमंत्री जी के सपने को पूरा करे। देश को विश्वगुरू बनाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी पर ही है।

जीवन जीने की कला अवश्य सिखाएं
विश्वविद्यालय के शिक्षक विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने के साथ-साथ भारतीयता के संस्कार
और जीवन जीने की कला अवश्य सिखाएं। विद्यार्थी देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और अन्य महापुरूषों की जीवनी का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा लें। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय लगातार उत्कृष्ट कार्य करके विन्ध्य का नाम रोशन कर रहा है। विश्वविद्यालय में हाल ही में रामायण पीठ की स्थापना की गई है। इससे रामायण पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और विद्वानों को नए अवसर मिलेंगे। राज्यपाल ने समारोह से पहले विश्वविद्यालय के नवीन निर्मित केन्द्र का उद्घाटन किया।

अयोध्या जैसी अनुभूति होती है
समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरदास ने कहा कि जात-पात और धर्म का भेद मिटाकर हम सब सच्चे मन से केवल भारतीय बनकर भारत माँ की सेवा करें। हमारे कार्य और जिम्मेदारियाँ अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सबका मूल चरित्र केवल भारतीय होना चाहिए। प्राचीन दर्शन और शिक्षा के संस्कार हम सदैव याद रखें। उन्होंने कहा कि रीवा आकर अयोध्या जैसी अनुभूति होती है। यहाँ रामायण गान, शंखध्वनि और पवित्र देवस्थानों से रीवा के तीर्थस्थान होने का आभास होता है। रीवा से गुजरात का बड़ा निकटता का नाता है। रीवा क्षेत्र से ही निकलने वाली माँ नर्मदा गुजरात की जीवनदायिनी नदी और सबकी श्रद्धा का केन्द्र है। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी।