रीवा की कलेक्टर प्रतिभा भ्रष्ट है,पैसा उनकी कमजोरी है-अभय - rashtrmat.com

रीवा की कलेक्टर प्रतिभा भ्रष्ट है,पैसा उनकी कमजोरी है-अभय

राष्ट्रमत न्यूज भोपाल (ब्यूरो)। रीवा जिले के सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने कहा की रीवा की कलेक्टर प्रतिभा पाल भ्रष्ट हैं। वो सिर्फ पैसा कमाना जानती हैं। उन्हें किसी से कोई सारोकार नहीं है। पैसा उनकी कमजोरी है।इसके लिए वो आदमी पाल रखाी हैं जो उनके लिए काम करते हैं। उनके लिए उगाही का काम करते हैं। सरकार के बनाए वेयर हाउस में हमारे यहां के 58 किसानों ने अपनी फसलें बेची लेकिन उन्हें आज तक पैसा नहीं मिला। सहकारिता के समिति प्रबंधक वेयर हाउसिंग और नान नागरिक आपूर्ति निगम की उपार्जन समिति होती है।इसकी अध्यक्ष कलेक्टर प्रतिभा पाल हैं। कलेक्टर की वजह से हमारे यहां के किसान खाद के लिए लाठियां खाई। किसानों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिल रहा है कलेक्टर प्रतिभा पाल की वजह से।


इससे लेती है प्रतिभा पैसा
विधायक अभय मिश्रा ने बताया कि कलेक्टर प्रतिभा पाल पैसा कैसे लेती है। उन्हें पैसा ज्ञानेन्द्र पहुंचाते हैं। वो गृह ग्राम में चार पांच साल से हैं। अधिकारी उत्तर बनाकर भेज देते हैं कि ये गुढ़ का निवासी है रीवा जिले का नहीं हैं। जैसे हम कहें कि मैं बैरागढ़ का हूं भोपाल का रहने वाला नहीं हूं। इस तरह से उसके माध्यम से कलेक्टर पैसा लेती हैं।


किसानों के पक्ष में बोलना जुर्म है
विधायक ने अभय मिश्रा नेे कहा कि सरकार की फसल खरीदने की पंजीयन की नीति फेल है। उसमें कई खामियां हैं। समिति प्रबंधक ऐसा करते हैं कि पहले अलग अलग नामों से झूठे पंजीयन करा लेते हैं। और किसानों को रसीदें दे दीं। इसके बाद अलग अलग फर्जी नामों से पैसा दे दिया। अंतिम में जब ये बचे हुए किसान अपना पैसा लेने गए तो एक अधिकारी रीना श्रीवास्तव ने रिपोर्ट दी कि किसानों के साथ गलत हो रहा है।कलेक्टर ने उसी अधिकारी को सस्पेंड कर दिया और कहा कि तुमने किसानों का पक्ष क्यों लिया। दिखावे के लिए किसानों के लिए कमेटी बनाई मगर उस कमेटी के लोगों ने किसानों से बात नहीं की। उल्टा समिति प्रबंधक के पक्ष में रिपोर्ट बना दिया।


किसानों की हितैषी नहीं प्रतिभा
विधायक ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने उन किसानों के नाम आनलाइन पोर्टल से डिलीट करा दिए। ये किसान झूठे हैं किसान चोर हैं, इन्होंने कुछ नहीं बेचा। बाद में हल्ला मचा और दबाव बना तो बोलीं कि किसान सही हैं। इनका पैसा दिया जाए।सवाल यह है कि जब किसानों के नाम पोर्टल से डिलीट हो गए तो पैसा कैसे देंगे। और पैसा बचा भी नहीं। अब कहते हैं कि डीएमएफ से दे देंगे, फला फंड से दे देंगे। किसान अपने एक एक पैसा के लिए भटक रहा है।

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