ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी में घोटाले के दाग किसी और पर - rashtrmat.com

ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी में घोटाले के दाग किसी और पर

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।स्वास्थ्य विभाग में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी में घोटाला हुआ।जिसका बिल बगैर आरटीआई के बाहर जाने से विभाग के अधिकारी परेशाान हैं। जनवरी 2025 में विभाग ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जो कि तीन रुपए का है,उसे 12 रुपए की दर से खरीदा। हुए इस घोटाले का बिल बाहर आने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। इस मामले में सीधा आरोप सीएमएचओ परेश उपलप और सिविल सर्जन निलय जैन पर लग रहा है।


आरोप परेश पर लग रहे
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी का बिल वायरल हो गया। बिल में बिलिंग जनवरी 2025 की है। उस दौरान तात्कालीन सीएमएचओ मनोज पांडे पदभार में थे। चूंकि मामला प्रसूताओं को आपात स्थिति में दी जाने वाली आॅक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी से जुड़ा है। जिसकी खरीदी में अनियमितता करने का आरोप अब सीएचएमओं परेश उपलप पर लगाया गया है। हालांकि सीएमएचओ डाॅ परेश उपलप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ये उन्हें बदनाम करने की साजिश है।


तीन रुपए का इंजेक्शन 12 में
दरअसल ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खरीदी से जुड़े तीन बिल में दो बिल में सीएमएचओ स्तर से हुई खरीदी के हैं। जहां 20 हजार इंजेक्शन 3.9 रुपये की दर और 15 हजार इंजेक्शन 3.7 रुपये की दर पर खरीदी हुई है। जिसका क्रमशः 87360 रुपये और 62160 बिल है। लेकिन सिविल सर्जन स्तर के एक बिल में 12 रुपये प्रति इंजेक्शन की दर से 2750 इंजेक्शन 36960 रूपये में खरीदा गया है। यहां सिविल सर्जन स्तर से जारी बिल में 03 रुपये के इंजेक्शन को 12 रुपये में खरीदने पर ज्यादा बवाल मच गया।
आरोप बेबुनियाद बता रहे
विभागीय जानकारी अनुसार ये इंजेक्शन प्रसूता महिलाओं को दिये जाते है। ट्रामा सेंटर में रोजाना बड़ी संख्या में प्रसूताओं के प्रसव होते हैं। जो बेहद महत्वपूर्ण होते है। इस इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई न होने के कारण अस्पताल में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की कमी पाई गई थी और गायनोकोलाजिस्ट लगातार इस इंजेक्शन की मांग कर रही थी। जहां प्रसूताओं के त्वरित उपचार के लिए विभाग द्वारा इन इंजेक्शन की लोकल पर्चेसिंग की गई थी। जिसके लिए तीन कोटेशन मांगे गए थे। जिसमें कम दर पर याने 12 रूपये में खरीदी की गई थी। जबकि ओपन मार्केट में आक्सीटोसिन का एक इंजेक्शन 16 रुपये में मिलता है। ऐसे में जिम्मेंदार इंजेक्शन खरीदी में लग रहे अनियमितता के आरोप बेबुनियाद बता रहे हैं।


विभाग ने बिल बाहर किया
इस पूरे मामले में मीडिया को दिये गये बयान में सीएमएचओ डाॅ परेश उपलप और सिविल सर्जन डाॅ निलय जैन ने कहा कि उक्त बिल कैसे बाहर आये उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जबकि आरटीआई या अन्य किसी माध्यम से बिल की कापी मांगे जाने से जुड़े कोई आवेदन भी प्राप्त नही हुए हैं। संदेह है कि विभागीय अमला ही बिल को सार्वजनिक किया होगा। जिसके बाद अधिकारी अब इस मामले की जांच करने की बात कह रहे हैं।

मेरे कार्यकाल में खरीदी नहीं हुई
सीएमएचओ डाॅ परेश उपलप ने कहा कि ऐसे निराधार आरोप लगाकर मुझे बदनाम करने की साजिश की गई है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। चूंकि जारी बिलों को गंभीरता के देखा जाये तो बिलिंग की तारिख 15 जनवरी 2025 है। तो यह इंजेक्शन माह जनवरी में तात्कालीन सीएमएचओ मनोज पांडे के कार्यकाल में दौरान ही खरीदे गये होगें। अब प्रकरण जो भी हो, मामला गंभीर है और जांच का विषय बन चुका है।