रात में झोले में नवजात बालिका मिली,महिलाओं ने अस्पताल पहुंचाया - rashtrmat.com

रात में झोले में नवजात बालिका मिली,महिलाओं ने अस्पताल पहुंचाया

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट जिले के लांजी में मंगलवार रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच वार्ड नंबर 10 में सिंघाड़ा तालाब के पास झोले में नवजात बालिका मिली।बच्ची को सिविल अस्पताल लांजी में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, उसका वजन 2 किलो 400 ग्राम है और वह स्वस्थ है।

रोने की आवाज सुनी महिलाएं

तालाब किनारे पड़ा एक थैला और उसके भीतर जिंदगी की पहली सांसों के साथ संघर्ष करती एक नन्ही सी मासूम। दुनिया में आंखें खोलने के कुछ ही समय बाद उसे न जाने किसने अपनों से दूर कर दिया। जिस उम्र में उसे मां की गोद का एहसास होना चाहिए था, उस उम्र में वह कपड़े में लिपटी थैले के भीतर अकेली पड़ी अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी। उसे न भूख-प्यास बताने का तरीका मालूम था और न ही अपनी पीड़ा किसी को समझाने का हुनर। उसके पास बस रोने की आवाज थी और यही आवाज उसकी जिंदगी की उम्मीद बन गई। जहाँ दो महिलाओं ने उस आवाज को सुना, इंसानियत दिखाई और एक मासूम को मौत के मुहाने से वापस जिंदगी की ओर ले आईं।

किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी
यह हृदय-विदारक घटना 03 नवंबर की रात करीब 8 बजे लांजी नगर के वार्ड क्रमांक 10 स्थित भिलाई रोड के चमारबोडी तालाब के पास सामने आई। जानकारी के अनुसार दुर्गा तरुण आसटकर और कविता सोनवाने रास्ते से गुजर रही थीं। इसी दौरान उन्हें तालाब किनारे से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब वे आवाज की दिशा में पहुंचीं तो वहां एक थैला दिखाई दिया। थैले को खोलकर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके भीतर कपड़े में लिपटी एक नवजात बालिका पड़ी हुई थी। मासूम की हालत देखकर दोनों महिलाएं घबरा गईं और तत्काल आसपास के लोगों को आवाज देकर बुलाया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

बचाने की जिम्मेदारी उठाई
उस अंधेरी रात में दोनों महिलाओं ने जो किया, वह केवल एक मानवीय मदद नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल बन गया। एक ओर किसी ने नवजात को सुनसान तालाब किनारे थैले में छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया था, वहीं दूसरी ओर दो अनजान महिलाओं ने उसे अपना समझकर बचाने की जिम्मेदारी उठाई। जानकारी के अनुसार गीता सोनवाने अपनी सहयोगी महिला के साथ काम से लौट रही थीं। तभी उन्हें बच्ची के रोने की आवाज आई। बच्ची मिलने के बाद उन्होंने उसे घर ले जाकर साफ-सफाई की और दूध पिलाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। दोनों महिलाओं की तत्परता ने मासूम को समय रहते मदद दिलाई।

निगरानी में बच्ची को रखा गया
सूचना मिलते ही लांजी   नगर निरीक्षक घनश्याम बैरागी पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और नवजात को तत्काल सिविल अस्पताल लांजी पहुंचाया गया। अस्पताल के मेटरनिटी कक्ष में चिकित्सकों की निगरानी में बच्ची को रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार बालिका का वजन 2 किलो 400 ग्राम है और फिलहाल वह पूरी तरह स्वस्थ है। बीएमओ डॉ. अक्षय उपराडे ने घटनाक्रम की जानकारी एसडीएम आदित्य नारायण तिवारी को दी।   उन्होंने बच्ची की सुरक्षा, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समुचित उपचार और देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उसके संरक्षण के लिए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। बीएमओ द्वारा पुलिस थाने में लिखित तहरीर भी दी गई है।

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