राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।रीवा संभाग कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने पीआईयू,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जल निगम विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए जहां निर्माण कार्य होने हैं वहां निर्माण कार्य प्रारंभ होने के पूर्व पीआईयू के अधिकारी भूमि और स्थल का निरीक्षण अनिवार्य रूप से कर लें। बाद में यह समस्या न आए कि जमीन पथरीली, उबड़-खाबड़ थी, इसलिए निर्माण कार्य संभव नहीं हो पाया। स्थल निरीक्षण के बाद ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर लगाए जाएं।

सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
कमिश्नर ने निर्माण कार्य में अनावश्यक रूप से 1 से 2 वर्ष की देरी पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की और
कहा कि कार्य के समय सीमा में पूरे न होने पर मैटेरियल कॉस्ट बढ़ता है और शासन को अनावश्यक
राशि की हानि उठानी पड़ती है। कमिश्नर ने कहा कि निर्माण कार्य के टेंडर लगाने के बाद यदि जमीन की रिवाइज करने की जरूरत पड़ी तो इसके लिए संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पर जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ठेका सक्षम ठेकेदार को ही दिया जाए
कमिश्नर ने सभी महाप्रबंधक को निर्देश दिए कि वह ठेकेदारों के कार्यकी सतत मॉनीटरिंग करें। कमिश्नर ने कहा कि बजट आवंटन के अभाव में निर्माण कार्य किसी भी स्थिति में रुकने नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य का ठेका सक्षम ठेकेदार को ही दिया जाए,जिससे राशि आवंटन में देरी होने पर भी वह कार्य कर सके।
लोक निर्माण विभाग को भेजी जाए
कमिश्नर ने बिना फील्ड में जाए ड्राइंगऔर डिजाइन बनाने वाले कंसल्टेंटों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे कंसल्टेंट जो स्थान और भूमि का निरीक्षण किए बिना ड्राइंग एवं डिजाइन बनाते हैं उनकी सूची बनाकर एसीएस लोक निर्माण विभाग को भेजी जाए। चीफ इंजीनियर का यह प्रमुख दायित्व है कि वह अपने अधीनस्थ इंजीनियर को पहले जमीन का मुआयना कराए और उसके बाद ही टेंडर निकाला जाए, नहीं तो लेआउट में दिक्कत होगी। कमिश्नर ने हिदायत दी की इस्टीमेट रिवाइज करने वाले एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के विरुद्ध नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसकी गलती से रिवाइज्ड इस्टीमेट बढ़ाया गया है।