राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। चालीसबोड़ी.कुल्पा.माटे.पालागोंदी.बम्हनी मार्ग की सड़क जमीन पर उखड़ गयी लेकिन फाइलों में चकाचक है। मंत्री के करीबी ने794 करोड़ की सड़क को मजाक बना दिया। सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। निगरानी भी नहीं की गयी। करोड़ों का भुगतान भी कर दिया गया। कागजों पर सड़क का सुपरविजन किया गया।
विभाग के अफसरों ने अनदेखी की
सड़क करीब एक वर्ष पूर्व बनी थी जो आज जगह जगह उखड़ गयी है।इस सड़क के लोकार्पण के समय बड़े बड़े दावे किये गये थे। आज यह सड़क दावे का मजाक उड़ा रही है। भारत सरकार की आरसीपीएलडब्ल्यू योजना के तहत करीब 11.5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण पर सरकार ने 794.38 लाख रुपये खर्च किए गए थे। 02 जनवरी 2023 को जारी हुए वर्क आॅर्डर के बाद ठेकेदार ने निर्माण कार्य शुरू किया। किंतु शुरूआत से ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आने लगी थीं। क्षेत्रीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण के दौरान ही घटिया रेत, निम्न स्तर के सीमेंट और मानकों के विपरीत सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया था। मीडिया के माध्यम से भी इस ओर लगातार ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर अनदेखी की।

सड़क की गिट्टियां बाहर आ गयीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार को विभागीय मंत्री का बेहद खास होने के कारण पूरा संरक्षण मिलता रहा। यही कारण रहा कि नियमों,मापदंडों और तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किया गया। विभागीय अधिकारियों द्वारा किया गया तथाकथित सुपरविजन केवल कागजों तक सीमित रहा। जमीनी हकीकत यह है कि जहां निगरानी होनी चाहिए थी, वहां मिलीभगत ने जगह ले ली और जनता की गाढ़ी कमाई ठेकेदार की तिजोरी में समा गई। आज स्थिति यह है कि बम्हनी और पालागोंदी के बीच सड़क का हिस्सा पूरी तरह से उखड़ चुका है। कई स्थानों पर गिट्टियां बाहर आ गई हैं। डामर की परत गायब हो चुकी है।
एक साल में मर गयी सड़क
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सड़क क्षेत्रीय आदिवासी जनता की वर्षों पुरानी मांग थी। इसके लिए ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपे और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाए। लंबा संघर्ष करने के बाद यह मार्ग स्वीकृत हुआ। लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने लोगों की उम्मीदों को ठेंस पहुचा दी। यह पूरा मामला न केवल ठेकेदार की मनमानी को उजागर करता है, बल्कि विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। क्योकि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क का एक साल में उखड़ जाना निसंदेह बडा सवाल है। अब क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि इस सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।