राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। इन दिनों देश में अयोध्या में राम मंदिर बन जाने के बाद बाबरी मस्जिद का नाम नहीं लिया जा रहा है। लेकिन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभी अस्थायी स्टाल में बाबरी मस्जिद की तस्वीर लगी हुई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद चर्चा का विषय बन गई है। यहां के बेलडांगा में लाल ईंटों के ढेर में एक आस्थाई मंच बना है और लगे हुए बैनर पर लिखा यह बाबरी मस्जिद का स्थल होगा।यानी मुस्लिम नेता अपना एक चुनावी फ्रंट बनाने में लगे हैं। यदि ऐसा हो गया तो ममता बनर्जी का वोट बैंक खिसक सकता है। इस रणनीति में बीजेपी का हाथ न भी हो मगर इससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। बीजेपी चाहती भी थी कि चुनाव से पहले ऐसा कुछ हो जाए कि ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लग जाए। वैसे ममता बनर्जी ने मुर्शिदबाद के मामले में कुछ बोल नहीं रही है। जाहिर सी बात है कि वो समझ रही हैं कि मुस्लिम वोटर खिसका तो उनकी सीट पर असर पड़ेगा।

बाबरी मस्जिद से प्यार है
मुर्शिदाबाद इन दिनों चर्चे में है। इसलिए कि जिस जमीन पर मस्जिद बन रही है वहां एक दर्जन से ज्यादा अस्थायी स्टॉल लगे हैं जिन पर अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तस्वीरें छपी हैं। बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने ध्वस्त कर दिया था। यहां की टी.शर्ट और मग पर बाबरी मस्जिद से प्यार की बात कही गई है। मुझे बाबरी मस्जिद से प्यार है। बाबरी मस्जिद के जैसी ये मस्जिद बनवाने का ऐलान टीएमसी से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने किया है।
एकजुट होने का आह्वान किया
इतना ही नहीं, हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) नाम से अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई है और आगामी विधानसभा चुनावों में 135 के करीब उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने टीएमसी पर अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया और बंगाल के मुसलमानों से एकजुट होने का आह्वान किया है।

SIR की वजह से उथल-पुथल
अब अहम बात यह भी है कि राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का मुद्दा राजनीतिक एजेंडे पर हावी है। टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा इसका इस्तेमाल मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए कर रही है। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय में उथल-पुथल मची हुई है और सत्ताधारी पार्टी के खेमे से बाहर एकजुट होने की होड़ लगी हुई है।
हुमायूं कबीर ने कहा
मौजूदा विधानसभा में एकमात्र गैर-टीएमसी और गैर-भाजपा मुस्लिम विधायक इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने 17 जनवरी को विधानसभा चुनावों में टीएमसी और भाजपा दोनों के खिलाफ गठबंधन का आह्वान किया था। इसके तुरंत बाद हुमायूं कबीर ने कहा कि गठबंधन जल्द से जल्द बनना चाहिए।आईएसएफ और नौशाद का संबंध हुगली जिले के प्रसिद्ध फुरफुरा शरीफ दरगाह से है। दोनों पार्टियों के सूत्रों ने बताया कि चुनावों के लिए एक साथ आने के प्रयास जारी हैं। जानकारी के अनुसार आईएसएफ और कबीर की जेयूपी के अलावा, केरल स्थित एसडीपीआई सहित अन्य छोटे संगठन भी गठबंधन के लिए बातचीत में शामिल हैं। एसडीपीआई प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की राजनीतिक शाखा है।
कांग्रेस-लेफ्ट को भी भेजा गया प्रपोजल
जेयूपी ने वाम मोर्चा और कांग्रेस को गठबंधन प्रस्ताव भेजे हैं और उनके जवाब का इंतजार कर रही है। हुमायूं कबीर ने कहा कि अगर कांग्रेस जल्द जवाब नहीं देती है, तो प्रस्तावित गठबंधन मालदा में उसके बिना ही आगे बढ़ेगा। उन जिलों में भी पैठ बनाने की कोशिशों पर चर्चा हुई है जहां मुसलमानों की संख्या पर्याप्त नहीं है।

ममता बनर्जी के लिए परेशानी
बंगाल में 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 27% है, वहां 2011 से टीएमसी का निरंतर वर्चस्व काफी हद तक महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन का परिणाम रहा है। हालांकि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि आईएसएफ और जेयूपी द्वारा प्रस्तावित गठबंधन से टीएमसी को नुकसान होगा, लेकिन कम से कम यह अल्पसंख्यक वोटों को बांटकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए कुछ क्षेत्रों में परेशानी खड़ी कर सकता है।