समय से पहले मोटापा घुटने को कर देता है खराबः डॉ अनंत - rashtrmat.com

समय से पहले मोटापा घुटने को कर देता है खराबः डॉ अनंत

राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली( रमेश कुमार ‘रिपु’)। सर गंगाराम हास्पीटल के आर्थिपेडिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर अनंत कुमार तिवारी कहते हैं घुटने के दर्द की असली वजह जोड़ के बीच का कार्टिलेज (गद्दी) घिस जाना या वहां की मांसपेशियों और लिगामेंट्स में कमजोरी आना है। जब यह सुरक्षा परत खत्म हो जाती है, तो हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। इससे घुटने में तेज दर्द, सूजन और अकड़न होने लगती है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता और इंन्फेक्शन पर निर्भर करता है जोड़ों का दर्द।  शरीर का वजन जितना ज्यादा होगा, घुटनों पर उतना ही अधिक दबाव पड़ेगा। इससे घुटने समय से पहले खराब होते हैं।जांघ और पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने से घुटने के जोड़ को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता है। बचपन या पहले कभी घुटने में लगी चोट आगे चलकर गंभीर दर्द का कारण बनती है।

घुटने के लिगामेंट  टूट जाते हैं– घुटना दर्द की मुख्य वजह के संदर्भ में डॉक्टर तिवारी ने कहा कि सबसे आम कारण है ऑस्टियो आर्थराइटिस (गठिया) यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाली सबसे आम समस्या है। इसमें घुटने के जोड़ की गद्दी पूरी तरह घिस जाती है। खेलने या गिरने के कारण घुटने के लिगामेंट  टूट जाते हैं। इससे जोड़ का संतुलन बिगड़ जाता है।मेनिस्कस टियर यह घुटने के अंदर की शॉक-एब्जॉर्बर कार्टिलेज होती है। अचानक पैर मुड़ने या झटका लगने से यह फट जाती है। शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से घुटने के जोड़ में इसके क्रिस्टल जमा हो जाते हैं। इससे अचानक बहुत तेज दर्द और सूजन आती है।

ऑपरेशन के  पहले की जांच-घुटने के रिप्लेसमेंट ऑपरेशन से पहले डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि मरीज का शरीर सर्जरी और बेहोशी (एनेस्थीसिया) के लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं। इसके लिए कई तरह के मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं, जिन्हें प्री-ऑपरेटिव टेस्ट   कहा जाता है।ऑपरेशन के पहले घुटने की जांच एक्स-रे घुटने के जोड़ के खराब होने के स्तर को देखने के लिए खड़े होकर कई एंगल से एक्स-रे किए जाते हैं।एमआरआई (MRI) कुछ मामलों में घुटने के लिगामेंट्स और नरम ऊतकों (Tissues) की स्थिति जानने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।

यदि मरीज को डायबिटीज है, तो शुगर का नियंत्रण में होना बहुत जरूरी है, नहीं तो इन्फेक्शन का खतरा रहता है।किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट  यह जांचने के लिए कि शरीर दवाइयों को सही से प्रोसेस कर पाएगा या नहीं।यूरिक एसिड  के सही कारण की पुष्टि करने के लिए।ब्लड ग्रुपिंग यदि सर्जरी के दौरान खून चढ़ाने की जरूरत पड़े, तो ब्लड ग्रुप पहले से पता होना चाहिए।

 दिल और फेफड़ों की जांच.ईसीजी और इकोकार्डियोग्राम दिल की धड़कन और दिल के काम करने की क्षमता को जांचने के लिए।चेस्ट एक्स-रे फेफड़ों में किसी संक्रमण या बीमारी का पता लगाने के लिए। अन्य जरूरी जांचेंयूरिन टेस्ट (Urine Routine): पेशाब में किसी भी तरह के इन्फेक्शन को रोकने के लिए, क्योंकि यह इन्फेक्शन सर्जरी के बाद घुटने तक पहुंच सकता है।मेडिकल फिटनेस क्लीयरेंस फिजिशियन और एनेस्थीसिया के डॉक्टर मरीज की सभी रिपोर्ट देखकर सर्जरी के लिए ‘फिट’ होने का सर्टिफिकेट देते हैं।

नी रिप्लेसमेंट चार प्रकार के-घुटने के प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) में उपयोग होने वाले इंप्लांट्स मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं। इन्हें मेडिकल स्थिति और मरीज की उम्र के आधार पर चुना जाता है। घुटनों के प्रत्यारोपण और उनमें उपयोग होने वाले प्लांट  के प्रकार निम्नलिखित हैं-

टोटल नी रिप्लेसमेंट –  यह सबसे आम प्रकार है। इसमें घुटने के जोड़ की दोनों घिसी हुई सतहों (जांघ और पिंडली की हड्डी) को पूरी तरह से हटाकर धातु और प्लास्टिक (पॉलीइथिलीन) के कृत्रिम जोड़ लगाए जाते हैं। पूरा जोड़ बदला जाता है, दर्द से पूरी राहत, रिकवरी में थोड़ा अधिक समय (6 से 12 हफ्ते) | लाइफ 15-20 साल।

आंशिक घुटना प्रतिस्थापन- इसे यूनिकॉन्डाइलर, नी रिप्लेसमेंट भी कहा जाता है। यह तब किया जाता है जब घुटने का केवल एक हिस्सा खराब होता है और बाकी जोड़ पूरी तरह से स्वस्थ होता है।

कैपिटल या पटेला रिप्लेसमेंट – अगर केवल घुटने की कटोरी (पटेला) और जांघ की हड्डी के बीच का जोड़ खराब होता है, तब इस प्रकार के इंप्लांट का उपयोग किया जाता है।

जटिल या रिवीजन नी रिप्लेसमेंट-  यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब किसी पुराने इंप्लांट के ढीले या खराब हो जाने के कारण उसे निकालकर नया इंप्लांट लगाना पड़ता है, या फिर घुटने को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा हो।

इंप्लांट्स की सामग्री – धातु पर प्लास्टिक का उपयोग सबसे अधिक होता है। इसके अलावा निकल एलर्जी वाले मरीजों के लिए सिरेमिक और गोल्ड-प्लेटेड इंप्लांट्स भी प्रचलन में हैं।

पार्शियल और टोटल नी रिप्लेसमेंट -दोनों ही अपनी जगह बहुत अच्छे हैं। कौन सा इंप्लांट आपके लिए सबसे अच्छा रहेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके घुटने को कितना नुकसान पहुंचा है। जब घुटने का केवल एक ही हिस्सा खराब हो और बाकी दो हिस्से बिल्कुल स्वस्थ हों। सिर्फ खराब हिस्सा बदला जाता है, प्राकृतिक अहसास, बहुत तेज रिकवरी (3 से 6 हफ्ते) | लाइफ 10-15 साल।

 टोटल नी रिप्लेसमेंट  कब अच्छा है- जब घुटने के जोड़ के दोनों या तीनों हिस्से पूरी तरह खराब हो चुके हों। यदि आपको बहुत गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस है। लंबे समय का आराम: यह इंप्लांट बहुत लंबे समय (लगभग 15-20 साल या उससे ज्यादा) तक चलता है।

टेढ़े पैर-यदि घुटने की खराबी के कारण पैर बहुत ज्यादा टेढ़े हो गए हों, तो उन्हें सीधा करने के लिए यह सबसे अच्छा है।

प्राकृतिक महसूस होना: इसमें घुटने के असली लिगामेंट्स  को नहीं निकाला जाता, जिससे चलने में घुटना ज्यादा नेचुरल लगता है।

जल्दी रिकवरी- इसमें छोटा चीरा लगता है, खून कम बहता है और मरीज बहुत जल्दी ठीक होकर चलने लगता है।

कम उम्र- यह युवा मरीजों के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे टोटल रिप्लेसमेंट में बदला जा सकता है।

 गोल्ड-प्लेटेड / टाइटेनियम नाइट्राइड कोटिंग: आम इंप्लांट के ऊपर एक खास परत चढ़ाई जाती है, जिससे मेटल शरीर के सीधे संपर्क में नहीं आता। -सिरेमिक, ऑक्सिनियम या गोल्ड-कोटिंग वाले आधुनिक इंप्लांट सामान्य मेटल इंप्लांट की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक चलते हैं।

जिरकोनियम या सिरेमिक इंप्लांट – यह पूरी तरह मेटल-फ्री या हाइपोएलर्जेनिक होते हैं, जिससे एलर्जी का कोई खतरा नहीं रहता।

वह ज्यादा साल चलेगा-घुटने का नया इंप्लांट आमतौर पर 15 से 20 साल तक बहुत आसानी से चलता है। कई मामलों में, सही देखभाल के साथ यह 25 साल से भी ज्यादा समय तक ठीक से काम कर सकता है।  घुटने की लाइफ-मरीज की उम्र, मरीज का वजन जितना कम होगा, घुटने पर दबाव उतना ही कम पड़ेगा और वह ज्यादा साल चलेगा।

शारीरिक गतिविधियां– सर्जरी के बाद भारी सामान उठाना, जमीन पर बैठना, या दौड़ने-कूदने वाले काम करने से घुटना जल्दी घिस सकता है। हल्की वॉक और साइकलिंग इसके लिए बहुत अच्छी होती है।

क्या करने की अनुमति है-तेज चलना यह घुटने और सेहत दोनों के लिए सबसे बेहतरीन व्यायाम है।साइकिल चलाना-  इससे घुटने की मांसपेशियों की अच्छी कसरत होती है और जोड़ पर वजन भी नहीं पड़ता।

मेटल एलर्जी  का खतरा-हाँ, घुटने के रिप्लेसमेंट में मेटल एलर्जी  का खतरा की संभावना बहुत ही कम होती है। सामान्य आबादी में लगभग 10% से 15% लोगों को त्वचा पर मेटल एलर्जी होती है। लेकिन घुटने के इंप्लांट के अंदर जाने पर असली एलर्जी का खतरा 1% से भी कम  देखा जाता है।  घुटने के आम इंप्लांट कोबाल्ट-क्रोमियम धातु के बने होते हैं। इनमें बहुत कम मात्रा में निकल (Nickel) मिला होता है।

नोट-हड्डी  संबंधित किसी भी तरह की परेशानी पर इस नम्बर पर डाॅक्टर से संपर्क कर सककते हैं।

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