सोने की खेती \ बाल कहानी - rashtrmat.com

सोने की खेती \ बाल कहानी

रमेश कुमार ‘रिपु’ की  बाल कहानी सोने की खेती बताती है कि है पीपल के पेड़ के नीचे उस दिन की डींगें खत्म हो गईं, लेकिन बच्चों के मन में एक नई बात बस गई, किसान अपने परिश्रम से धरती पर सोना उगाता है।गेहूँ और धान की फसल ही उसके लिए असली सोना होती है।

सोने की खेती \ बाल कहानी

रमेश कुमार ‘रिपु’

गांव के बाहर पीपल के एक बड़े पेड़ के नीचे चार बच्चे रोज़ शाम को इकट्ठा होकर खेलते और बातें करते थे। उस दिन भी वे वहीं बैठे थे, लेकिन आज खेल कम और डींगें ज्यादा चल रही थीं।

सबसे पहले मुन्ना बोला, “मेरे दादा तो बड़े कमाल के आदमी थे। वे नमक की खेती करते थे।”

बाकी तीनों बच्चे चौंक पड़े।

“नमक की खेती?” गुड़िया ने आंखें फैलाते हुए पूछा, “भला नमक भी कहीं उगता है?”

मुन्ना ने गर्व से गर्दन ऊँची करते हुए कहा, “हाँ, मेरे दादा समंदर के पास रहते थे। बड़े-बड़े खेतों में पानी सुखाकर नमक निकालते थे। वही तो नमक की खेती हुई!”

अब बारी पिंटू की थी। वह पीछे क्यों रहता।

उसने तुरंत कहा, “यह तो कुछ भी नहीं। मेरे दादा तो पानी बरसाने का काम करते थे।”

तीनों बच्चे हँस पड़े।

“अरे, पानी बरसाना तो बादलों का काम होता है!” मुन्ना बोला।

पिंटू बोला, “तुम लोगों को पता ही क्या! मेरे दादा पूरे गांव में पेड़-पौधे लगाते थे। कहते थे, ‘जहाँ पेड़ होंगे, वहाँ बादल आएंगे और बारिश होगी।’ देखो, आज हमारे गांव में कितनी हरियाली है और कितनी बारिश होती है!”

बात सुनकर बच्चों ने सिर हिलाया। उन्हें लगा कि पिंटू भी कुछ कम नहीं है।

तभी रानी ने अपनी चोटी झटकते हुए कहा,“तुम लोग तो छोटी-छोटी बातें कर रहे हो। मेरे पापा इतने ताकतवर हैं कि मिनटों में पहाड़ को चकनाचूर कर देते हैं!”

“अरे वाह!” मुन्ना बोला, “क्या सचमुच?”

रानी ने गर्व से कहा, “हाँ! मेरे पापा इंजीनियर हैं। जब सड़क बनती है या सुरंग खोदी जाती है तो वे बारूद से बड़े-बड़े पहाड़ तोड़ देते हैं।”

अब तीनों बच्चे चुप हो गए। उन्हें लगा कि रानी की बात सच भी हो सकती है।

तीनों के बाद चौथा बच्चा छोटू चुप बैठा था। वह सोच रहा था कि अब वह क्या कहे। सबके दादा-पापा इतने बड़े काम करते हैं तो वह क्या बोले?

थोड़ी देर सोचकर उसने धीरे से कहा,“मेरी दादी तो सोने की खेती करती थीं।”

तीनों बच्चे एक साथ चौंक पड़े।

“क्या?” मुन्ना बोला, “सोने की खेती?”

“हाँ,” छोटू ने पूरे विश्वास से कहा, “मेरी दादी के खेतों में सोना उगता था।”

इतने में वहाँ से एक बुज़ुर्ग किसान गुजर रहे थे। बच्चों की बातें सुनकर वे मुस्कुराते हुए रुक गए।

उन्होंने प्यार से पूछा,

“बेटा, यह कैसी बातें हो रही हैं? जरा मुझे भी बताओ।”

बच्चों ने एक-एक करके अपनी-अपनी डींगें उन्हें सुना दीं।

बुज़ुर्ग ने हँसते हुए समझाया,“देखो बच्चों, नमक की खेती सचमुच होती है। समुद्र के पानी को सुखाकर नमक बनाया जाता है।”

फिर उन्होंने पिंटू की ओर देखकर कहा,“और पेड़-पौधे लगाने से सच में बारिश बढ़ती है। इसलिए तुम्हारे दादा का काम भी बहुत अच्छा था।”

रानी की ओर देखकर बोले,“इंजीनियर लोग सच में बारूद की मदद से पहाड़ तोड़कर सड़कें बनाते हैं। इसलिए तुम्हारे पापा भी बड़े काम के आदमी हैं।”

अब वे मुस्कुराते हुए छोटू की तरफ मुड़े।

“लेकिन बेटा,” उन्होंने पूछा,“तुम्हारी दादी सोने की खेती कैसे करती थीं?”

छोटू ने बिना झिझक जवाब दिया,

“मेरी दादी के पास सोने के बीज थे। वे उन्हें खेतों में बो देती थीं। कुछ महीनों बाद पूरे खेत में सोने के पेड़ उग आते थे।”

बच्चे हैरानी से उसे देखने लगे।बुज़ुर्ग ने भी मुस्कुराते हुए पूछा,“अच्छा! फिर उस सोने का क्या होता था?”

छोटू बोला,“जब फसल पकती थी तो पूरा खेत सोने की तरह चमकने लगता था। मेरी दादी कहती थीं कि यही हमारा असली सोना है।”

बुज़ुर्ग किसान कुछ समझ गए। उन्होंने बच्चों को खेतों की ओर इशारा किया।दूर-दूर तक गेहूँ की सुनहरी बालियाँ हवा में झूम रही थीं।

उन्होंने कहा,“बच्चों, किसान के लिए गेहूँ और धान की फसल ही सोना होती है। जब फसल पकती है तो खेत सचमुच सोने की तरह चमकते हैं। वही अनाज सबको खाना देता है, सबकी जिंदगी चलाता है।”

चारों बच्चे चुपचाप उन सुनहरे खेतों को देखने लगे।अब उन्हें छोटू की बात पूरी तरह समझ में आ गई थी।बुज़ुर्ग किसान ने मुस्कुराते हुए कहा,“इस धरती पर अगर कोई सच में सोना उगाता है, तो वह किसान है।”

यह सुनकर चारों बच्चों की आँखों में चमक आ गई।पीपल के पेड़ के नीचे उस दिन की डींगें खत्म हो गईं, लेकिन बच्चों के मन में एक नई बात बस गई,धरती पर उगने वाला अन्न ही असली सोना है।

सीख– किसान अपने परिश्रम से धरती पर सोना उगाता है।गेहूँ और धान की फसल ही उसके लिए असली सोना होती है।

रमेश कुमार ‘रिपु’,प्रयागराज,बाई के बाग के पास, यूपी

मो.7974304532