श्याम कुंवर भारती की कहानी मुक्ति दो माँ संदेश देती है कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करने का साहस ही वास्तविक रास्ता है। मनुष्य को निराशा में हार मानने के बजाय उम्मीद का दामन थामना चाहिए। साथ ही, दूसरों के दुःख को समझना, जीवों के प्रति दया रखना और निःस्वार्थ भाव से दूसरों का कल्याण करना ही सच्ची मुक्ति का मार्ग है।
मुक्ति दो माँ \ कहानी
आधी रात का समय था । गांव के बाहर बगीचे में काफी हलचल था ।जबकि पूरा गाँव गहरी नींद की आगोश में सोया हुआ था।
बगीचे में आत्माओं का जमघट लगा हुआ था।कुछ आत्माएं मिलकर एक आत्मा को मारपीट रही थी ।वो आत्मा दर्द से कराह रही रहीं थी।सबसे छोड़ देने की गुहार लगा रही थी ।लेकिन कोई उसे छोड़ने को तैयार नहीं थी ।
तभी उन आत्माओं के सरदार ने बाकी आत्माओं को उसे छोड़ने को कहा ।
उस सरदार आत्मा ने अपनी खूंखार आंखों से उसे घूरते हुए कहा – देखो तुम अभी नए नए भूत बने हो ।जब तुम जिंदा थे और मनवा योनी में थे तब वहाँ का नियम अलग था ।जब तुम्हे कोई सताता या मारता पीटता था।तब बचाने के लिए कानून कोर्ट_ कचहरी , पुलिस और नेता थे ।लेकिन अब जबकि तुम मारकर प्रेत योनी में आ गये हो । यहाँ कोई नियम कानून नहीं है।
यहां किसकी लाठी भैंस उसी की है।अभी भूतों का सरदार मै हूँ ।इसलिए यहाँ मेरा कानून चलता है।जैसा मै कहूंगा वैसा तुम्हे मानना पड़ेगा वरना मेरे साथ के भूत तुम्हे इतना मारेंगे और सतायेंगे की तुम त्राहि त्राहि करोगे।
उस कमजोर आत्मा ने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा – सरदार मेरी रक्षा करे मै आपकी हर बात मानूंगा ।जब मैं जिंदा था तब भी गुंडे बदमाश मुझे बहुत सताते थे ।क्योंकि मैं बिल्कुल अकेला था ।मेरे आगे पीछे कोई नहीं था।
इसलिए तो मेरे मरने के बाद मेरा श्राद्ध और पिंडदान किसी ने नहीं किया ।मैने तो अपनी आत्म हत्या अपनी जिंदगी से तंग आकर किया था यह सोचकर कि मरने के बाद तो मुझे शांति मिलेगी लेकिन यहाँ तो उल्टा ही हो गया।
मरने के बाद भी दुख दूर नहीं है।जिंदा रहता तो अपनी मदद के लिए किसी को बुला भी सकता था।अपनी गरीबी और दुख दूर करने का कोई उपाय भी कर सकता ।लेकिन इस प्रेत योनी में तो कोई सुनने वाला नहीं है और मैं कुछ कर भी नहीं सकता।
सरदार अब तो मुझे अपनी आत्म हत्या करने पर बड़ा अफसोस हो रहा है।
भूतों के सरदार ने एक डरवाना सा अट्टहास कर कहा – अब समझ में आ गया न तुझे कि अपनी आत्म हत्या करना कितनी बड़ी मूर्खता और कष्टदायक है ।लेकिन जो गलती तुम्मने किया है उसकी सजा तो तुम्हे ही भुगतनी पड़ेगी।
सुन मुझे जोर की भूख और प्यास लगी है।जा जल्दी गांव के अंदर और एक मोटा ताजा बकरा उठा कर ला वरना मै तेरा गला दबा दूंगा इस तरह ।इतना कहकर उस सरदार ने उस कमजोर आत्मा का गला दबाने लगा। वो भूत दर्द से छटपटाने लगा।
मुझे छोड़ दो सरदार मै अभी आपके खाने के लिए बकरा लेकर आता हूँ। थोड़ी ही देर में सरदार ने उसका गला छोड़ दिया ।
वो भूत वहाँ से गायब हो गया।
रास्ते में वो अपनी करनी को कोश रहा था। मैने अपने ही हाथों अपनी जान लेकर बहुत बड़ी गलती कर दिया। अब तो मेरी मुक्ति मुश्किल है।
मेरा कोई परिवार भी नहीं है जो मेरा श्राद्ध और पिंडदान कर मुझे पितृ लोक में भेजेगा ।अब मैं क्या करूं । यहाँ तो बड़े खूंखार भूत है जो मुझे चैन से रहने नहीं देंगे।पता नहीं मुझसे क्या क्या उल्टे सीधे काम करवाएंगे।
थोड़ी ही देर में वो एक घर के पास पहुंचा जिसके दरवाजे पर एक झोपड़ी बनी हुई थी जिसमें दस बारह बकरियां बंधी हुई थी ।उसने उसके से एक मोटा ताजा बकरा उठा लिया और भाग चला ।
तभी खूंखार कुत्ते उसके पीछे पड़ गये ।पता नहीं कुत्तों ने उसे कैसे देख लिया ।कुछ बिल्लियाँ भी उसे देखकर म्याऊं म्याऊं करने लगी ।वो उस बकरे को लेकर तेजी से भागता रहा ।किसी तरह वो एक पेड़ के पास आकर सांस ले ही रहा था कि तभी कुत्ते भौंकते हुए उस पेड़ की तरफ आते दिखाई दिए।
वो उस बकरे को लिए हुए उस पेड़ पर चढ़ गया।वो जैसे ही उस पेड़ पर चढ़ा वहाँ पहले से एक भूत छिपा हुआ था।उसे देखते ही वो डर से कांपने लगा और डरते हुए कहा – देखो मुझे कुछ मत करना । मुझे तो सरदार ने इस बकरे को लाने के लिए कहा था।
उस भूत ने कहा – देखो तुम मुझसे मत डरो।मै भी तुम्हारी ही तरह नया नया भूत बना हूँ।मैं भी उस सरदार के डर से इस पेड़ पर छिपकर बैठा हूं।
सुनो मेरा पूरा परिवार कोरोना काल में मर चुका हैं।जिनका श्राद्ध और पिंडदान मैने ही किया था जिससे सभी प्रेत योनी से मुक्त होकर पितृ लोक में जा चुके हैं।
लेकिन मैं बाढ़ में डूबकर मरा।मेरे रिश्तेदारों ने मेरा जमीन मकान सब हड़प लिया लेकिन मेरी लाश को ढूंढकर मेरा अंतिम दाह संस्कार नहीं किया और नहीं मेरी आत्मा की मुक्ति के लिए मेरा श्राद्ध और पिंडदान किया।इसलिए मैं भी प्रेत बन कर इस सुनसान पेड़ पर बैठा हूँ।
उस प्रेत की बात सुनकर वो भूत बड़ा दुखी हुआ और पूछा – आपकी बातों से तो आप बड़े ज्ञानी मालूम होते हैं।हम दोनों की मुक्ति का मार्ग बताए।
तब उस प्रेत ने कहा – देखो एक उपाय है। कालों की भी काल काली माता है।वो भगवान शिव की अर्धांगिनी है।जितना बिकराल रूप है माता का है।काली माता उतनी ही दयालु भी है।
इस गांव के पूरब दिशा में एक काली मां का मंदिर है।हम दोनों वहां चलते है । माता के चरणों में अपना सिर पटकते है।मा को मुक्ति के लिए पुकारते हैं।अगर माता मान गई तो हमदोनों की मुक्ति निश्चित है।
फिर इन प्रेतों के अत्याचार और प्रेत योनी दोनों से मुक्ति मिल जायेगी।
उसकी बात सुनकर वो बहुत बहुत खुश हुआ ।उसे आशा की एक किरण नजर आई।उसने कहा – फिर देर किस बात की है चलो दोनों अभी चलते हैं माता। के शरण में और मां को पुकारते है।
ठीक है चलो चलते हैं।उस पेड़ वाले प्रेत ने कहा।फिर दोनों उस पेड़ से नीचे उतर गये।
इस बकरे का क्या करे।उस भूत ने पूछा क्या इसे सरदार को दे दे।
तुम मुर्ख हो क्या ।सरदार के पास हरगिज मत जाना वो फिर तुम्हे कोई काम सौंप देगा ।इसी तरह वो तुम्हे रात दिन सताता रहेगा।
इस बकरे को यही छोड़ दो इसका मालिक इसे खोज लेगा।बेकार में किसी जीव की हत्या के पाप का भागी क्यों बने ।हमे मुक्ति चाहिए तो पाप से बचना होगा।उस प्रेत ने कहा।
तभी वो नया भूत डरते हुए बोला लेकिन उस मंदिर तक कैसे जाएंगे।मेरे पीछे तो बड़े खूंखार कुत्ते पड़े हुए हैं।
उस प्रेत ने हंसते हुए कहा – अरे मुख तुम अब भी अपने आपको आदमी समझ रहे हो ।अब मान लो कि हम दोनों भूत हैं।कुत्ते हमारा कुछ बिगड़ नहीं सकते ।सिर्फ भोंक सकते हैं।अब चलो तेजी से इससे पहले कि सरदार के भूत हमे पकड़ ले जल्दी भागो यहां से।इतना कहकर दोनों वहां से माँ काली के मंदिर की तरफ भाग खड़े हुए।रास्ते में कुत्तों ने फिर उनका पीछा किया।लेकिन दोनों बिना डरे और रुके हुए मां काली के मंदिर पहुंच गए।
वहाँ पहुंचकर उन दोनों ने देखा वहाँ कुछ भूत पहले से माता की सेवा में लगे हुए थे।वे दोनों माता के चरणों में गिरकर अपना सिर पटकने लगे।और करुण भाव से पुकारने लगे मुक्ति दो माँ मुक्ति दाे मा।
थोड़ी देर में एक दिव्य रोशनी उन दोनों की तरफ आई।उन दोनों ने महसूस किया कि उन दोनों के अंदर कोई शक्ति प्रेवश हुई ।अब वे खुद को शक्तिशाली महसूस ने लगे।
तभी कुछ योगिनियां उनके पास आई और बोली – तुम दोनों को मां ने कुछ शक्तियाँ प्रदान किया है।इससे तुम्हे कोई साधारण भूत या प्रेत तुम दोनों का कोई नुकसान नहीं कर पाएंगी।अब से तुम दोनों हमारे साथ रहकर माँ की आज्ञा से लोगों का कल्याण का काम करोगे।जब समय आएगा माता तुम दोनों को मुक्ति दे देंगी तब तुम दोनों अपने लोक को जा सकोगे।दोनों उनकी बात सुनकर अति प्रसन्न हुए हो पुनः माता के चरणों में दण्डवत प्रणाम किया और मां। का जोरदार लगाने लगे जय मां काली जय मां काली।
श्याम कुंवर भारती
बोकारो, झारखंड
मां.9955509286



