राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट में ईओडब्लयू ने सत्ता और राजनीति के साथ मिलकर किस तरह राइस मिलर्स घोटाले कर रहे थ,े उसे न केवल खुलासा किया। बल्कि बताया कि सत्ता के लोग भी किस तरह शासन को आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं। ईओडब्ल्यू ने जिला विपणन विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के छह अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे के करीबी दो राइस मिलर्स के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह मामला शासन को 2.73 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाने से जुड़ा है।

जांच में यह भी सामने आया कि विपणन और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने राइस मिलर्स के उस बयान को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि एक चालक नींद में ट्रक को 25 किलोमीटर तक चला ले गया था।यह घटना तब उजागर हुई जब मिल के लिए आ रही धान को 25 किलोमीटर दूर रजेगांव में पकड़ा गया। इस घटना ने अधिकारियों की कथित मिलीभगत पर सवाल खड़े किए हैं।
पूर्व मंत्री और BJP अध्यक्ष के करीबी मिलर्स
ईओडब्ल्यू ने कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपए की शासकीय धान की हेराफेरी में जिस राईस मिलर्स समीर सचदेव के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया है। वह पूर्व मंत्री और वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के करीबी और उनके खास समर्थकों में एक है।

EOW की जांच में भारी आर्थिक क्षति
ईओडब्ल्यू की शिकायत जांच में पाया गया कि वर्ष 2023-24 में कस्टम मिलिंग के दौरान शासकीय धान की हेराफेरी, अवैध परिवहन और दस्तावेजों को छिपाने में अनियमितताएं की गईं। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित बालाघाट (मार्कफेड) और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों पर राइस मिलर्स के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है।जांच के अनुसार, मार्कफेड विभाग ने कस्टम मिलिंग के नियमों का पालन किए बिना राइस मिलर्स को 2.73 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। यह भुगतान तब किया गया जब धान की हेराफेरी और अवैध परिवहन के स्पष्ट संकेत मौजूद थे, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई।
अधिकारी दे रहे थे राइस मिलर्स को संरक्षण
अधिकारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने राइस मिलर्स पिता-पुत्र को उनकी गलतियों पर संरक्षण प्रदान किया। इतना ही नहीं, मिलिंग के लिए दिए गए धान को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ भेजे जाने की जानकारी के बावजूद, मिलिंग की राशि का भुगतान राइस मिलर्स को किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभागों के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से राइस मिलर्स को संरक्षण दे रहे थे।इसमें कोई जांच नहीं की गई और ना ही मिलिंग के नियमों का पालन किया गया। फिलहाल इस मामले में वर्तमान में नॉन जिला प्रबंधक हरीश कोरी और राईस मिलर्स समीर सचदेव से चर्चा कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

इनको बनाया आरोपी
- मार्कफेड के तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त) अभिषेक निषाद
- तत्कालीन विपणन अधिकारी हिरेन्दसिंह रघुवंशी
- वर्तमान जिला विपणन अधिकारी विवेक तिवारी
- तत्कालीन जिला विपणन उप प्रबंधक (वित्त) और वर्तमान नॉन जिला प्रबंधक हरीश कोरी
- MP स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के तत्कालीन जिला प्रबंधक पीयूष माली
- लेखापाल (वित्त) दुर्गेश बैस
- सचदेव राइस मिल, कोसमी के प्रोपराइटर प्रकाश सचदेव
- राइस मिल संचालक समीर सचदेव