सूचना-तंत्र दरअसल एक ‘साइकोलॉजिकल बूचड़खाना’ है जहाँ हर सुबह विवेक की बलि दी जाती है और…
Category: साहित्य भूमि
बना रहे रिश्तों का कोलाज़
डॉ. सेवाराम त्रिपाठी बता रहे हैं आज रिश्ते टूट नहीं रहे, धीरे-धीरे घिस रहे हैं।जैसे किसी…
जिम्मेदार लेखक अपनी अनुपस्थिति से भी उपस्थित रहता है – प्रो. त्रिपाठी
राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। हाल ही में साहित्यकार, कवि विनोद कुमार शुक्ल, नासिर अहमद सिकंदर, अवधेश प्रीत और…
इंसान ही बेदखल हो जाए क्या यही नया दौर है
आज जब विकास को सड़कों, बिजली, कारखानों और मशीनी सुविधाओं से आँका जा रहा है, ऐसे…
तकनीकी विकास और विसंगतियों का परिप्रेक्ष्य
विकास के नाम पर केवल काँखने – कराहने और मुँह पटकने का कोई औचित्य नहीं हो…