डॉक्टर पर गलत ऑपरेशन का आरोप लगाने वाली महिला ने की आत्महत्या - rashtrmat.com

डॉक्टर पर गलत ऑपरेशन का आरोप लगाने वाली महिला ने की आत्महत्या

 राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।असहनीय दर्द, इलाज की उम्मीद और सरकारी दफ्तरों के चक्कर। रीवा की मिथिलेश सिंह की जिंदगी की आखिरी कहानी स्वास्थ्य व्यवस्था और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। अपने कंधे के ऑपरेशन के बाद लगातार दर्द से परेशान मिथिलेश सिंह ने डॉ. शुभम मिश्रा पर इलाज में लापरवाही और पैसे नहीं देने पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगाया था। महिला ने अपनी पीड़ा अधिकारियों के सामने भी रखी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद उसे राहत नहीं मिली। आखिरकार असहनीय दर्द से परेशान महिला ने बीती रात कथित तौर पर खुद को आग लगा ली, जिससे उसकी मौत हो गई।
निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई 
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि महिला ने अपनी मौत से पहले बयान दिया था, जिसमें उसने डॉक्टर पर आरोप लगाए थे। इस बयान की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब महिला के आरोपों, उसके उपचार से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।
कलेक्टर से लगाई थी इलाज की गुहार
मिली जानकारी के अनुसार, 24 सितंबर को मिथिलेश सिंह ने रीवा कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताई थी। महिला ने गुहार लगाई थी कि या तो उसका समुचित इलाज कराया जाए या फिर उसके कंधे के संबंध में ऐसा चिकित्सकीय निर्णय लिया जाए, जिससे उसे असहनीय दर्द से मुक्ति मिल सके।
बताया जाता है कि महिला की शिकायत के बाद कलेक्टर कार्यालय से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को पत्र जारी किया गया था। इसके बाद सीएमएचओ कार्यालय से पत्र संजय गांधी अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला
हालांकि, पत्र जारी होने और संबंधित अस्पताल तक पहुंचने के बाद महिला के इलाज के लिए क्या कदम उठाए गए, उसे कब चिकित्सकीय परामर्श मिला और उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट होना बाकी है। यदि महिला की शिकायत के बाद भी उसे समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता नहीं मिली, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।
डॉ. शुभम मिश्रा पर लगाए थे गंभीर आरोप
मिथिलेश सिंह ने अपने कंधे का ऑपरेशन डॉ. शुभम मिश्रा से कराया था। ऑपरेशन के बाद महिला लगातार दर्द से परेशान रही। उसने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से शिकायत की थी।महिला का आरोप था कि डॉक्टर ने उससे पैसे की मांग की और पैसे नहीं देने के कारण उसका गलत ऑपरेशन किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष अभी सामने आना जरूरी है। डॉक्टर का पक्ष भी सामने आना चाहिए, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके।
निराशाजनक जवाब मिले
बताया गया है कि महिला ने रीवा के अलावा दिल्ली, भोपाल और जबलपुर में भी हड्डी रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेने की कोशिश की थी। आरोप है कि उसे दोबारा ऑपरेशन की संभावना को लेकर निराशाजनक जवाब मिले। इन चिकित्सकीय परामर्शों और उपचार की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित डॉक्टरों की रिपोर्ट तथा मेडिकल रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
दर्द से राहत के लिए भटकती रही महिला
किसी भी मरीज के लिए बीमारी और असहनीय दर्द से जूझना अपने आप में बड़ी परेशानी है। ऐसी स्थिति में जब मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यालयों तक पहुंचता है, तो उसकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित संस्थाओं की होती है।
मिथिलेश सिंह की मौत ने यही सवाल खड़ा किया है कि उसकी शिकायत को कितनी गंभीरता से लिया गया। क्या उसकी चिकित्सकीय स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया? क्या उसे दर्द से राहत दिलाने के लिए वैकल्पिक उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश हुई? क्या कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र पर समय रहते कार्रवाई की गई?इन सवालों के जवाब केवल संबंधित अधिकारियों के बयान से नहीं, बल्कि पत्राचार, अस्पताल के रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट से सामने आने चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल
मिथिलेश सिंह की मौत के बाद रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस घटना के आधार पर पूरे चिकित्सा जगत पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं होगा, लेकिन मरीजों की शिकायतों के निस्तारण में यदि लापरवाही हुई है, तो उसकी जवाबदेही तय करना जरूरी है।
चिकित्सकीय राय सामने आनी चाहिए
यह भी जांच का विषय है कि महिला को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में किस स्तर की चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और क्या उसे किसी दूसरे विशेषज्ञ या उच्च चिकित्सा केंद्र में उपचार के लिए भेजने की आवश्यकता थी।निजी अस्पतालों में उपचार, मरीजों से कथित आर्थिक मांग और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जरूरी है। लेकिन किसी डॉक्टर या अस्पताल के विरुद्ध निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित पक्षों का बयान, उपचार के दस्तावेज और स्वतंत्र चिकित्सकीय राय सामने आनी चाहिए।
अब निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की जरूरत
मिथिलेश सिंह की मौत केवल एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह मरीजों की शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था की भी परीक्षा है। महिला ने अपनी पीड़ा अधिकारियों तक पहुंचाई थी। उसने डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए थे और इलाज की गुहार लगाई थी। अब उसकी मौत के बाद इन आरोपों और शिकायतों की जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए
प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। महिला के मृत्यु-पूर्व बयान की रिकॉर्डिंग, ऑपरेशन से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टर के उपचार संबंधी दस्तावेज, कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र और सीएमएचओ तथा संजय गांधी अस्पताल के बीच हुए पत्राचार की पड़ताल की जानी चाहिए।
यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता या किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
मिथिलेश सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी शिकायतें और मृत्यु से पहले दर्ज बयान कई सवाल छोड़ गए हैं। इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही से ही मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *