राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। जिले के आदिवासी बाहुल्य बिरसा विकासखंड की घुम्मूर पंचायत के अंतर्गत आने वाले चार गांव आज भी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं।घुम्मुर पंचायत के मुरकुट्टा, कोड़बीकोना और चिखली गांवों में सड़क, पुल और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सड़क है नहीं तो गांव विककसत कैसे होंगे। स्कूल है मगर भवन जर्जर है। बारिश में इन गावों में चलना मुहाल है।ग्रामीणों का कहना है घुम्मर पंचायत के गांव नक्सल प्रभावित क्षेत्र थे,इसके बावजूद कभी कोई विशेष पैकेज का लाभ नहीं मिला। वहीं जनमन योजना के तहत जिन गांवों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की उम्मीद थी वे भी अब तक अपेक्षित विकास की बाट जोह रहे हैं।

मुरकुट्टा तक भी पक्की सड़क नहीं
राष्ट्रमत टीम कोड़बीकोना गांव पहुंची, तो वहां की स्थिति सामने आई। पंचायत मुख्यालय घुम्मूर से कोड़बीकोना तक सीधा संपर्क मार्ग नहीं होने के कारण ग्रामीणों को गिडोरी के नयाटोला से होकर कच्चे रास्ते के सहारे गांव तक पहुंचना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह रास्ता ग्रामीणों के लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर देता है। ग्रामीणों के अनुसार कोड़बीकोना को जनमन योजना में शामिल कर सड़क सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कोड़बीकोना से मुरकुट्टा तक भी पक्की सड़क नहीं है। दोनों गांवों के बीच पड़ने वाली सोननदी पर पुल का निर्माण नहीं होने से आवागमन में कठिनाई होती है। सड़क और पुल के अभाव का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में आवाजाही पर भी पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क और पुल निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्राथमिक शाला भवन जर्जर
कोड़बीकोना गांव में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव का प्राथमिक शाला भवन जर्जर होने के कारण विद्यालय का संचालन दूसरे भवन में करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित जगह की कमी देखने मिलती है। ग्रामीणों की मांग है कि विद्यालय के लिए उचित भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। सरपंच जयपाल सिंह तिलगाम ने बताया कि पंचायत की इन समस्याओं से शासन और प्रशासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।