किरनापुर बलवाकांड: 63 नामजद, 26 गिरफ्तार,शराब परोसने का दावा - rashtrmat.com

किरनापुर बलवाकांड: 63 नामजद, 26 गिरफ्तार,शराब परोसने का दावा

 राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। किरनापुर थाने में 2 सितंबर को कथित तौर पर गर्भवती महिला और उसके पति के साथ पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने के आरोप से शुरू हुआ विवाद अब बलवाकांड और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। मामले में पुलिस ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, समाज के जिलाध्यक्ष रमेश पांचे समेत कुल 63 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चार पुलिस कर्मी निलंबित
   दरअसल, 2 सितंबर को किरनापुर थाना क्षेत्र में डाकघर चोरी के मामले की जांच के दौरान कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी सावित्री चौधरी को पुलिस द्वारा थाने लाया गया था। आरोप लगाया गया कि थाने में महिला के साथ मारपीट की गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। हालांकि, इस कार्रवाई से समाज के लोग संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने मामले में कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए 15 सितंबर को आंदोलन का ऐलान किया। 15 सितंबर को किरनापुर में समाज की ओर से रैली और धरना प्रदर्शन शुरू हुआ।
भीड़  किरनापुर थाने पहुंची
प्रदर्शन के दौरान भीड़ का एक हिस्सा किरनापुर थाने की ओर पहुंच गया। पुलिस के अनुसार इसी दौरान कुछ तत्वों ने थाने का घेराव करते हुए माहौल बिगाड़ा और पुलिस पर पथराव किया। पथराव में पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग, आंसू गैस और अन्य आवश्यक कदम उठाने पड़े। घटना के बाद पुलिस ने बलवा, पथराव और अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की।
आरोपियों को जेल ले जाती पुलिस।
कथित सुनियोजित साजिश
 पुलिस जांच में अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कथित सुनियोजित साजिश के पहलू की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि घटना से तीन-चार दिन पहले ही कुछ लोगों द्वारा माहौल तैयार करने की योजना बनाई गई थी। पुलिस का दावा है कि बाहरी तत्वों को एकत्र करने के साथ ही कुछ सामाजिक लोगो और युवाओं को शराब परोसे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस ने कथित तौर पर आवलाझरी से किरनापुर तक शराब पहुंचाए जाने के संबंध में भी तथ्य जुटाए हैं।
घटना के पीछे किसकी भूमिका थी
 पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के पीछे किसकी भूमिका थी और हिंसा को किस तरह अंजाम दिया गया। जांच के दौरान सामाजिक संगठनों से जुड़े कुछ चर्चित लोगों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति का नाम सामने आना अपने आप में उसके अपराधी होने का प्रमाण नहीं है।
महिला जिसको लेकर हुआ विवाद।
बलवाकांड में कोई भूमिका नहीं
  पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने कहा है कि एफआईआर में नाम दर्ज होने मात्र से कोई व्यक्ति अपराधी नहीं हो जाता। बलवा जैसी घटनाओं में कई लोगों के नाम सामने आते हैं। पुलिस प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने यह भी कहा कि जिन लोगों का नाम एफआईआर में आया है, लेकिन बलवाकांड में उनकी कोई भूमिका नहीं है और वे स्वयं को निर्दोष मानते हैं, तो वे पुलिस को जांच में सहयोग कर सकते हैं। ऐसे लोगों को साक्ष्य उपलब्ध कराने में पुलिस की मदद करनी चाहिए।
आरोपी मानना उचित नहीं
पुलिस के अनुसार यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने नहीं आती है तो केवल एफआईआर में नाम होने के आधार पर उसे आरोपी मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल 26 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बाकी नामजद लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं, 2 सितंबर की कथित पुलिस मारपीट से शुरू हुआ यह विवाद अब कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव का बड़ा मामला बन चुका है। वही इस मामले क़ो लेकर कई अन्य तरह की चर्चाये भी तेज हो चुकी है।
कंकर मुंजारे कार्यक्रम में थे
  एसपी आदित्य मिश्रा ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे पर दर्ज हुई एफंआईआर को लेकर कहा कि कंकर मुंजारे जिले के एक वरिष्ठ नेता हैं, वे भी उस दिन कार्यक्रम में शामिल थे। लेकिन पुरे घटनाक्रम के बाद भी उन्होंने बयान दिया कि फरवरी 1975 में उन्होंने थाना जलाया था। अगर ऐसे उपद्रव के बाद कोई भड़काउ बयान देकर सोचे कि वे बच सकते हैं, तो हमें लगता हैं कि ऐसे लोगों की समाज में भी कोई स्वीकारता होंगी? सावर्जनिक मंच से किसी भी जनप्रतिनिधी के द्वारा ऐसी बाते करना, बेहद ही दुखदाई लगता है। इससे पता चलता है कि वे पता नही किस तरह का राजनैतिक हितलाभ लेने की आंकाक्षा रखते है? मेरा उनसे आग्रह है कि वे घबराये नही, एफआईआर दर्ज जरूर हुई है लेकिन उनकी उपस्थिति को देखते ही वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

निर्दोष को सजा ना मिले

इस मामले में मरार माली समाज के जिलाध्यक्ष रमेश पंचे ने बताया कि समाज का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। जिसमें हुई घटना बाहरी तत्वों ने की। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों पर कार्यवाही हो पर निर्दोष को सजा ना मिले। इस घटना में जरूर कोई षडयंत्र है, जिसकी जांच होनी चाहिएा।

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