राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट के समता चौक निवासी विवेक तिरपुड़ेे की स्कूटी स्लिप में घायल उंगली का इलाज करने में डाॅक्टरों में लापरवाही की। आज सौ दिन हो गए कोमा में है। परिवार अब तक इलाज में पचास लाख रुपए खर्च कर चुका है। सरदार पटेल अस्पताल में एक्सरे में हाथ की उंगली में फ्रैक्चर निकला। डाॅक्टरों ने प्लास्टर कर दिया। परिवार को लगा कि मामूली चोट है कुछ दिन में सब सामान्य हो जाएगा।ठीक नहीं होने पर चिकित्सकों ने आॅपरेशन करा लेने की सलाह दी। आज स्थिति यह है कि वो कोमा में है। डाॅक्टर इसे अपनी लापरवाही नहीं मान रहे हैं।

फिर कभी होश में नहीं लौटे
बालाघाट के विवेक तिरपुड़े कपड़े बदले, दोस्तों से बात की और फिर सरदार पटेल अस्पताल चले गए। एक्सरे में हाथ की उंगली में फ्रैक्चर निकला। डॉक्टरों ने प्लास्टर कर दिया। परिवार को लगा कि मामूली चोट है, कुछ दिन में सब सामान्य हो जाएगा।लेकिन उसी शाम डॉक्टरों ने कहा कि जल्दी रिकवरी के लिए 20 मिनट की एक छोटी सर्जरी करनी होगी। डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया- कोई रिस्क नहीं है। 36 साल के विवेक हंसते हुए ऑपरेशन थिएटर में गए, लेकिन फिर कभी होश में नहीं लौटे।

अब तक 50 लाख खर्च
परिजन का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान एनस्थीसिया देने में गंभीर लापरवाही की गई। सांस की नली में डाली जाने वाली ट्यूब आहार नली में चली गई, जिससे ब्रेन तक ऑक्सीजन नहीं पहुंची। अब विवेक पिछले 100 दिन से कोमा में हैं। परिवार उन्हें लेकर बालाघाट से नागपुर और फिर भोपाल के निजी अस्पतालों तक भटक रहा है। इलाज में अब तक करीब 50 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। पुलिस ने डॉक्टरों पर केस दर्ज कर लिया है। वहीं, मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने भी तीन डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अब अस्पताल ही दूसरा घर
विवेक के बड़े भाई अमित की शादी को अभी छह महीने ही हुए हैं। वे और उनकी पत्नी दीक्षा पिछले तीन महीने से अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। अब अस्पताल ही उनका दूसरा घर बन गया है। अमित कहते हैं, “मैं चाहता हूं कि किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो। जब तक कार्रवाई नहीं होगी, हम लड़ाई लड़ेंगे।विवेक तिरपुड़े सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने एनवायरमेंट साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और हाल ही में केमिकल मटेरियल प्रोसेसिंग की कंपनी शुरू की थी। पिता रिटायर्ड इंजीनियर हैं। बड़े भाई अमित आईआईटी मुंबई से मेटेरोलॉजी में एमटेक हैं जबकि भाभी दीक्षा डॉक्टर हैं।पिता आरसी तिरपुड़े कहते हैं, ‘अगर अस्पताल में इमरजेंसी संभालने की सुविधा नहीं थी तो ऑपरेशन नहीं करना चाहिए था। डॉक्टरों ने अब तक यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि हमारा बेटा किस हालत में है।’ मां विद्या कहती हैं- अब दिन और तारीख याद नहीं रहती। रोज लगता है कि आज बेटा आंख खोलेगा, लेकिन वो दिन नहीं आता।
पेशेंट ड्रग एडिक्ट था
सीएमएचओ रिपोर्ट और परिजन के आरोपों पर सरदार पटेल अस्पताल के डायरेक्टर वीरेश्वर सिंह ने लापरवाही से इनकार किया है। उनका कहना है कि विवेक ड्रग एडिक्ट था। शराब भी लेता था। इसी वजह से पहले एनस्थीसिया का असर नहीं हुआ और दोबारा डोज देना पड़ा।