राष्ट्रमत न्यूज,बीजापुर(ब्यूरो)। नगर पालिका कार्यालय के पीछे स्थित छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) की करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बिल्डिंग बदहाली का शिकार होती नजर आ रही है। हालत ऐसी है कि भवन पूरी तरह उपयोग में आने से पहले ही खंडहरनुमा स्थिति में पहुंच गया है। दीवारों में दरारें, उखड़ता प्लास्टर और चारों ओर फैली झाड़ियां निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

गंभीर लापरवाही
करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस भवन की मौजूदा स्थिति सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है। भवन की हालत यह बताने के लिए काफी है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और निगरानी को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई है।
जल्दबाजी आखिर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल अब उस प्रस्तावित 30 से 50 लाख रुपये की लागत वाली बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर खड़ा हो रहा है, जो इस जर्जर भवन के चारों ओर बनाई जा रही है। जब मूल भवन ही मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग कर रहा है, तब उसके चारों ओर नई बाउंड्रीवाल खड़ी करने की जल्दबाजी आखिर क्यों?
निर्माण में हुई खामियों पर पर्दा
चर्चा यह भी है कि कहीं इस बाउंड्रीवाल निर्माण के पीछे कोई बड़ा सरकारी तंत्र या विभागीय खेल तो नहीं चल रहा। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जर्जर भवन की वास्तविक स्थिति को छुपाने, निर्माण में हुई खामियों पर पर्दा डालने और एक नए निर्माण के जरिए फिर से सरकारी राशि खर्च करने की तैयारी की जा रही है? यदि ऐसा है तो यह न सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है, बल्कि जिम्मेदार विभागीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
विभागीय खेल तो नहीं
तस्वीरें साफ संकेत दे रही हैं कि पहले मूल भवन की गुणवत्ता और उसकी वर्तमान स्थिति की तकनीकी जांच होनी चाहिए। इसके बजाय बाउंड्रीवाल निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की तैयारी कई शंकाओं को जन्म दे रही है।अब जरूरत इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करने की है कि आखिर जर्जर भवन के चारों ओर नया निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है और इसके पीछे कहीं कोई बड़ा विभागीय खेल तो नहीं।
बड़ा सवाल
जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत छोड़ बाउंड्रीवाल पर लाखों खर्च करने की तैयारी… आखिर इसके पीछे कौन सा खेल चल रहा है?