राष्ट्रमत न्यूज,पटना(ब्यूरो)। बिहार पुलिस ने दावा किया है कि तीन लाख रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम के आत्मसमर्पण के साथ राज्य ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से बुधवार देर रात जारी बयान में कहा गया है कि कोड़ा ने तीन असॉल्ट राइफल, सैकड़ों कारतूस और मैगजीन के अलावा कुछ नकदी के साथ बुधवार को मुंगेर जिले में विशेष कार्यबल (STF) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

कोड़ा पर 60 मामले दर्ज थे
बयान के अनुसार, कोड़ा पर कम से कम 60 मामले दर्ज थे, जिनमें से कई गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज किए गए थे। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए संचालित ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना’ के तहत कोड़ा को भी लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
राज्य नक्सल-मुक्त हो गया
इस योजना के तहत कोड़ा पर घोषित इनाम राशि तीन लाख रुपये के अलावा पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और 36 महीनों तक व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिमाह 10,000 रुपये का वजीफा दिया जाएगा। बयान में कहा गया है, ”कोड़ा के आत्मसमर्पण के साथ बिहार में नक्सली नेटवर्क का पूरी तरह सफाया हो गया है और पूरा राज्य नक्सल-मुक्त हो गया है।”
सुरेश स्पेशल एरिया कमेटी का कमांडर
इनामी माओवादी सुरेश कोड़ा माओवादी स्पेशल एरिया कमेटी का कमांडर और सक्रिय सशस्त्र दस्ते का सदस्य था। लड़ैयाटाड़ थाना क्षेत्र के पैसरा गांव का रहने वाला सुरेश कोड़ा पिछले 25 सालों से फरार था। पुलिस-सुरक्षाबलों के दबाव में उसने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। उसने एक एके 47, एक एके 56, दो इंसास रायफल और 505 कारतूस के साथ आत्मसमर्पण किया है।
बिहार अब नक्सलमुक्त
एसटीएफ के महानिदेशक कुंदन कृष्णन ने कहा कि बिहार अब नक्सलमुक्त हो चुका है। अब राज्य की सीमा के अंदर कोई बड़ा हथियारबंद नक्सली नहीं है। साल 2025 में रिकॉर्ड 220 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा को चुना। मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआइजी राकेश कुमार ने बताया कि सुरेश कोड़ा पर मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों में कुल 60 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सभी कांड साल 2008 से साल 2025 तक के दौरान मुंगेर, लखीसराय और जमुई जिलों में दर्ज किए गए थे। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत जिला प्रशासन की तरफ से आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों को विशेष पैकेज दिया जाएगा।
चल-अचल संपत्ति जब्त की गई
पुलिस ने नक्सलियों को पकड़ने के साथ ही उनकी फंडिंग के सोर्स भी खत्म कर दिए। यूएपीए (UAPA) और पीएमएलए (PMLA) एक्ट के तहत नक्सलियों की करोड़ों की चल-अचल संपत्ति जब्त की गई। इस दौरान साल 2012 से 2025 के बीच 6.75 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गईं। करीब 8.97 करोड़ रुपये की अन्य संपत्तियों की जब्ती का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजा गया है।