देवी तालाब मामलाः NGT ने याचिका खारिज करने से किया इंकार - rashtrmat.com

देवी तालाब मामलाः NGT ने याचिका खारिज करने से किया इंकार

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किए जाने को लेकर दायर याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी भोपाल ने याचिका को खारिज कर दिया। याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ है।इसलिए इसकी सुनवाई जारी रहेगी और आवश्यक आदेश भी पारित किए जाएंगे।


समरिते की याचिका पर फैसला हो चुका
नगर के जागरूक नागरिक द्वारकानाथ चैधरी और प्रदीप परांजपे की ओर से एनजीटी भोपाल में याचिका क्रमांक 130\,2025 प्रस्तुत की गई है। जिसमें देवी तालाब से अतिक्रमण हटाने दूषित जल प्रवाह को रोकने और तालाब के संरक्षण की मांग की गई है। याचिका पर 12 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिका में हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रविकांत पाटीदार ने मूल याचिका को खारिज करने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि देवी तालाब, जिसका रकबा 16.14 एकड़ बताया जा रहा है, निजी संपत्ति है। इस संबंध में पूर्व में सिविल न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय निर्णय दी चुका हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2015 में किशोर समरीते द्वारा दायर याचिका में भी इस विषय पर निर्णय हो चुका है।


याचिका खारिज नहीं कर सकते
इसके अतिरिक्त वर्तमान याचिकाकर्ताओं ने भी उच्च न्यायालय जबलपुर में भी जनहित याचिका दायर कर चुके हैं। इसलिए एनजीटी में याचिका निरस्त की जानी चाहिए। इन दलीलों को सुनने के बाद एनजीटी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत याचिका का विषय पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है, अतः इसे इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने कहा कि देवी तालाब जैसे जलस्रोतों का संरक्षण पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस संबंध में सुनवाई जारी रखी जाएगी।
देवी तालाब के दो मुद्दे
याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धरमवीर शर्मा राज्य से बाहर होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके।जिसके बाद एनजीटी की अनुमति से द्वारकानाथ चैधरी ने स्वयं याचिका में पैरवी की। उन्होंने बताया कि देवी तालाब से जुड़े दो प्रमुख मुद्दे हैं।पहला पर्यावरण की सुरक्षा और दूसरा राजस्व अभिलेखों में हुई गंभीर त्रुटियों का सुधार। पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की गई है, जबकि राजस्व रिकार्ड सुधार हेतु उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका विचाराधीन है।
निजी नामों पर दर्ज की गयी भूमि
पूर्व में राजस्व अधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए 3 डिसमिल के स्थान पर पूरी 16.14 एकड़ भूमि निजी नामों पर दर्ज कर दी गई। जिसकी जांच वर्ष 2020 में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा की गई थी। जांच प्रतिवेदन में भूमि को शासकीय देवी तालाब बताया गया था, किंतु अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


25 मार्च तक जवाब प्रस्तुत करें
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि देवी तालाब से अतिक्रमण हटाने और दूषित पानी के प्रवेश को रोकने के लिए 23 सितंबर 2025 और 10 नवंबर 2025 को दिए गए पूर्व आदेशों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। इन आदेशों का पालन कलेक्टर बालाघाट और मुख्य नगरपालिका अधिकारी को करना अनिवार्य है। एनजीटी ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिए हैं कि वे 25 मार्च 2026 तक अपने.अपने जवाब प्रस्तुत करें, ताकि याचिका का निराकरण गुण.दोष के आधार पर किया जा सके। साथ ही याचिकाकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वे उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका की वर्तमान स्थिति से भी ट्रिब्यूनल को अवगत कराएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *